हम इसलिए विभिन्न सेवाओं व योजनाओं को आधार लिंक नहीं कराना चाहते कि हम सभी को अपराधी मानते हैं, हम सिर्फ उन्हें अपराध से बचाना चाहते हैं। ये तर्क भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) की तरफ से बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में रखा गया।
चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ के समक्ष यूआईडीएआई की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) तुषार मेहता ने कहा कि विभिन्न सेवाओं और योजनाओं से आधार को लिंक करने का मकसद लोगों को अपराध से बचाने के लिए किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि जब हम हवाई यात्रा करते हैं तो सुरक्षा जांच होती हैं। यह जांच विमान को हाईजैक होने से बचाने के लिए की जाती है न कि यात्रियों को हाईजैकर समझकर। इस पर पीठ के सदस्य एके सिकरी ने सवाल किया सुरक्षा जांच उनकी होती है, जो यात्रा करते है। आप इसकी तुलना आधार के मामले में कैसे कर सकते हैं?
उन्होंने सवाल किया कि 128 करोड़ लोगों को बैंक खातों, पैन और मोबाइल सिम कार्ड को आधार से जोडने का क्या मकसद है? जवाब में एएसजी ने कहा कि इसका मतलब यह कतई नहीं है कि सभी दोषी है। यह प्रशासनिक तौर पर लिया गया फैसला है। किसी पर निजी तौर पर संदेह की बात नहीं है।
वहीं पीठ के सदस्य न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ ने सवाल किया कि आतंकवाद या राष्ट्रीय सुरक्षा की बात तो ठीक है, लेकिन क्या पूरी जनसंख्या को निजता के दायरे से बाहर कर आधार को लिंक करने को इसलिए कहा जाना चाहिए कि कर चोरी न हो?
जवाब में मेहता ने कहा कि यह कुछ करोड़ का मामला नहीं है बल्कि यह 33 हजार करोड़ रुपये कर चोरी का मामला है। आधार से लिंक होने पर कर चोरी पर लगाम लग सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि आधार को पैन से लिंक करने का मकसद अमीर और गरीब के बीच की खाई पाटने की कोशिश है। सुनवाई गुरुवार को भी जारी रहेगी।