विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने कुछ विश्वविद्यालयों की, सरकार द्वारा अधिकृत एक समिति से पंजीकरण कराए बगैर पशुओं की चीर-फाड़ करने के चलते खिंचाई की है। आयोग ने वर्ष 2014 में पशुओं की चीरफाड़ अनियमित करने की घोषणा की थी।
हालांकि, शिक्षाविदों एवं कार्यक्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने इसका यह कहकर विरोध किया था कि पशुओं के चीरफाड़ पर रोक से छात्रों को व्यवहारिक अनुभव में कमी आएगी। जीवविज्ञान मृत अध्ययन बन जाएगा, इसके बाद ‘पशुओं पर परीक्षण के नियंत्रण एवं पर्यवेक्षण के जुड़ी समिति’ (सीपीसीएसईए) का गठन किया गया था।
यूजीसी के सचिव पीके ठाकुर ने इस संबंध में सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को पत्र में कहा, ‘अभी भी कुछ गैर पंजीकृत प्रतिष्ठान और विश्वविद्यालय पशुओं पर शोध कर रहे हैं और वे सीपीसीएसईए के दिशानिर्देशों का पालन नहीं कर रहे हैं। उन्हें ऐसा प्राथमिकता के आधार पर करने की जरूरत है।’ सीपीसीएसईए वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करने वाली यह समिति एक नियामक संस्था है जो पशु परीक्षण या इस उद्देश्य से पशुओं का प्रजनन कराने वाली संस्था के पंजीकरण की सुविधा प्रदान करती है।