यूजीसी के सचिव प्रोफेसर मनीष जोशी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने निजी कारणों का हवाला दिया है। लेकिन उनका इस्तीफा समता विनियम 2026 से जुड़े विवाद के बाद आया, जिसे बिना सरकारी मंजूरी जारी करने पर सरकार और आरएसएस दोनों ने आपत्ति जताई थी।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी ) के सचिव प्रोफेसर मनीष जोशी को बिना सरकारी मंजूरी के समता विनियम 2026 का आधिकारिक संदेश जारी करना भारी पड़ गया। इस मसले पर उठा विवाद भले ही कुछ शांत पड़ गया हो लेकिन इसके चलते हुई फजीहत को सरकार भूली नहीं थी। इसी का परिणाम है कि जोशी ने शुक्रवार को अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफे के पीछे उन्होंने निजी कारणों का हवाला दिया है लेकिन वास्तविकता यह है कि संदेश पर उठे विवाद के बाद सरकार और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ दोनों ने उनसे दूरी बना ली थी।
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जोशी मूल रूप से महाराष्ट्र के रहने वाले हैं और वहां के एक विश्वविद्यालय में संगणक विज्ञान के प्राध्यापक हैं। उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बेहद करीबी और भरोसेमंद के रूप में देखा जाता था। इसी वैचारिक जुड़ाव के कारण फरवरी 2023 में उन्हें इस महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त किया गया था लेकिन समता विनियम 2026 उनके लिए परेशानी का सबब बन गया।
सूत्रों के अनुसार, इस संवेदनशील विषय पर सरकार अभी मसौदे के हर पहलू का बारीकी से अध्ययन कर रही थी लेकिन जोशी ने बिना किसी उच्चस्तरीय विचार-विमर्श या सरकारी मंजूरी के आयोग के आधिकारिक पटल से इसकी अधिसूचना सार्वजनिक कर दी। इस कदम ने सरकार को काफी असहज कर दिया। देशभर में सामान्य वर्ग का आक्रोश भड़क उठा और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। बताया जा रहा है कि बिना विमर्श के इतना बड़ा कदम उठाने पर संघ ने भी इस मामले में उनका बचाव करने से साफ इन्कार कर दिया था। विवाद के सार्वजनिक चर्चा से हटने के बावजूद यह मामला सुलग रहा था जिसका अंत अब उनके इस्तीफे से हुआ है।
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पांच वर्ष का था कार्यकाल
जोशी का कार्यकाल 3 फरवरी 2028 तक निर्धारित था लेकिन शनिवार 11 अप्रैल उनका सचिव के रूप में अंतिम कार्यदिवस होगा। आयोग के संयुक्त सचिव विपिन कौशल की ओर से शुक्रवार शाम जारी कार्यालय अधिसूचना के अनुसार, जोशी 11 अप्रैल के बाद अवकाश पर रहेंगे और 25 अप्रैल को उन्हें औपचारिक रूप से कार्यमुक्त कर दिया जाएगा। उनकी जगह फिलहाल अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद की सदस्य सचिव प्राध्यापक श्यामा रथ को कार्यवाहक सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
शिक्षा जगत में गहराया नेतृत्व का संकट
इस पूरे घटनाक्रम ने देश के उच्च और तकनीकी शिक्षा क्षेत्र में एक बड़ा प्रशासनिक शून्य पैदा कर दिया है। देश के तकनीकी संस्थानों का नियामक अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद पहले से ही बिना पूर्णकालिक अध्यक्ष के काम कर रहा है। अब विश्वविद्यालय अनुदान आयोग भी अध्यक्ष और स्थायी सचिव के बिना हो गया है। देश के सामान्य और तकनीकी विश्वविद्यालयों की पूरी व्यवस्था इस समय बिना किसी स्थायी प्रमुख के काम करने को विवश है।