संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा यानी यूडीएफ जमात-ए-इस्लामी का समर्थन स्वीकार करेगा। विपक्ष और कांग्रेस के नेता वी डी सतीसन ने विधानसभा में कहा कि संगठन धर्म की वकालत नहीं करता है। सतीसन ने कहा कि जमात-ए-इस्लामी ने साफ तौर पर कहा है कि देश के बहुलवादी राजनीतिक परिदृश्य में उसकी ऐसी कोई स्थिति नहीं है।
उन्होंने आरोप लगाया कि केरल समाज को बांटने के मकसद से समूह को अलग तरह से दिखाने के लिए एक जानबूझकर कहानी बनाई जा रही है। सतीसन ने आगे कहा जब पहले जमात-ए-इस्लामी धर्म के आधार पर राज्य का समर्थन किया था और 40 साल भाकपा के साथ गठबंधन में थे, तब उस पर कोई जांच नहीं हुई थी। उनका मतलबा था कि जब वे माकपा के साथ होते है तब उन्हें धर्मनिरपेक्ष माना जाता है। जब वे भाकपा छोड़ देते हैं, तो उन्हें सांप्रदायिक माना जाता है।
सतीसन ने यह भी कहा कि राज्य सचिव एम वी गोविंदन सहित कई भाकपा नेताओं ने पहले इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) को एक धर्मनिरपेक्ष पार्टी बताया था। अब, लीग उनके लिए एक समस्या है।