महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने महाकुंभ में न जाने को लेकर गुरुवार को शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे पर तंज कसा और कहा कि ठाकरे खुद को हिंदू कहने से डरते हैं। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में 45 दिनों तक चले महाकुंभ का समापन महाशिवरात्रि पर हुआ।
महाकुंभ को हिंदुओं का सबसे बड़ा पवित्र धार्मिक आयोजन माना जाता है। यह 13 जनवरी को शुरू हुआ था और 26 फरवरी को इसका समापन हुआ। इस साल महाकुंभ में पौराणिक गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम पर रिकॉर्ड 66 करोड़ श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई।
शिंदे ने पत्रकारों से बातचीत में बिना उद्धव ठाकरे का नाम लिए कहा, 'जो लोग महाकुंभ में शामिल नहीं हुए, उनसे पूछा जाना चाहिए कि वे क्यों वहां नहीं गए। वे कहते रहते हैं कि वे हिंदू हैं। बाल ठाकरे ने 'गर्व से कहो हम हिंदू हैं' का नारा दिया था, लेकिन अब वे (उद्धव ठाकरे) खुद को हिंदू कहने से डरते हैं और बाल ठाकरे को हिंदू हृदय सम्राट कहते हैं।' शिंदे ने ठाकरे और कांग्रेस के गांधी परिवार के महाकुंभ न जाने के सवाल पर यह प्रतिक्रिया दी।
जल्द सुलझा लिया जाएगा संरक्षक मंत्रियों से जुड़ा मुद्दा: एकनाथ शिंदे
उप मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि संरक्षक मंत्रियों के पद से जुड़े मुद्दों को जल्द ही सुलझा लिया जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि महायुति में मुद्दों को सौहार्दपूर्वक और समन्वय के साथ सुलझा लिया गया है। गिरीश महाजन (भाजपा) को नासिक और अदिति तटकरे (राकांपा) को रायगढ़ की संरक्षक मंत्री के रूप में नियुक्त करने के बाद राज्य सरकार ने आदेश को रोक दिया क्योंकि शिवसेना ने इन दो पदों पर दावा किया था।
शिंदे की पार्टी में शामिल हुए शिवसेना यूबीटी के पूर्व विधायक मिनचेकर
इस बीच, शिवसेना (यूबीटी) से जुड़े पूर्व विधायक सुहास मिनचेकर दोपहर में शिंदे के नेतृत्व वाली पार्टी में शामिल हो गए। कोल्हापुर के रहने वाले मिनचेकर शिवसेना (यूबीटी) से जुड़े तीसरे विधायक हैं, जो पंद्रह दिनों के भीतर शिंदे गुट में शामिल हुए हैं। 15 फरवरी को शिवसेना (यूबीटी) के पूर्व विधायक राजन साल्वी शिंदे के नेतृत्व वाली पार्टी में शामिल हो गए थे। राजापुर से तीन बार के विधायक साल्वी नवंबर में हुए विधानसभा चुनाव में शिवसेना के किरण सामंत से हार गए थे।
इस महीने पूर्व विधायक सुभास बाने भी शिवसेना में शामिल हुए। बाने शिवसेना (अविभाजित) के विधायक थे। लेकिन नारायण राणे के साथ बगावत कर कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में उप चुनाव में असफल रहे। बाद में वह फिर से शिवसेना (अविभाजित) में शामिल हुए। महाराष्ट्र विधानसभा चुनावमें में हार के बाद शिवसेना (यूबीटी) के नेता लगातार दलबदल कर रहे हैं।
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