फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Maharashtra Politics: उद्धव गुट पर भ्रष्टाचार के आरोप पर बवाल; दानवे, अंधारे ने की गोरहे की आलोचना

Sun, 23 Feb 2025 05:49 PM IST
अभिषेक दीक्षित पीटीआई, मुंबई

सार

दिल्ली में आयोजित 98वें अखिल भारतीय मराठी साहित्य महोत्सव में महाराष्ट्र विधान परिषद की उपसभापति गोरहे ने दावा किया कि शिवसेना (यूबीटी) में पद पैसे के माध्यम से प्राप्त किए जाते हैं। पद पाने के लिए उपहार के तौर पर मर्सिडीज कारें भी दी जाती हैं।
विज्ञापन
neelam gorhe - फोटो : ANI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

शिवसेना (उद्धव बालासाहब ठाकरे) नेता अंबादास दानवे ने रविवार को शिवसेना एमएलसी नीलम गोरहे की आलोचना की। गोरहे ने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। हाल ही में दिल्ली में आयोजित 98वें अखिल भारतीय मराठी साहित्य महोत्सव में महाराष्ट्र विधान परिषद की उपसभापति गोरहे ने दावा किया कि शिवसेना (यूबीटी) में पद पैसे के माध्यम से प्राप्त किए जाते हैं, जिसमें उपहार में मर्सिडीज कार देना भी शामिल है।

विज्ञापन


'मातोश्री पर मर्सिडीज गाड़ियों की लाइन लगी होती'
बयान पर पलटवार करते हुए विधान परिषद में विपक्ष के नेता दानवे ने कहा कि गोरहे को पार्टी के बारे में कोई समझ नहीं है। उन्होंने कहा, 'मेरी पार्टी ने मुझसे कभी एक रुपया भी नहीं मांगा। मैंने ग्रामीण इलाके में एक साधारण कार्यकर्ता से लेकर विधान परिषद में विपक्ष के नेता तक का सफर तय किया है। अगर गोरहे ने जो कहा, वह सच होता, तो मातोश्री यानी उद्धव ठाकरे का बांद्रा स्थित आवास पर मर्सिडीज गाड़ियों की लाइन लगी होती।'

'पार्टी के साथ लंबे जुड़ाव से उन्हें कितना लाभ हुआ?'
दानवे की साथी सुषमा अंधारे ने भी गोरहे पर हमला बोला। उन्होंने उन पर निशाना साधते हुए कहा कि गोरहे ने अविभाजित शिवसेना में 30 साल बिताए हैं और उनका काफी प्रभाव था। अंधारे ने कहा, 'अगर वह दावा करती हैं कि भ्रष्टाचार है, तो उन्हें अपने कार्यकाल के दौरान अपनी कमाई का हिसाब देना चाहिए। गोरहे को यह बताना चाहिए कि पार्टी के साथ लंबे जुड़ाव से उन्हें कितना लाभ हुआ है।'
विज्ञापन


'क्या साहित्यिक सम्मेलनों का इस्तेमाल राजनीतिक आरोप लगाने के लिए करना उचित?'
जून 2022 में शिवसेना में विद्रोह के बाद शिवसेना के दोफाड़ के कुछ समय बाद गोरहे एकनाथ शिंदे गुट में शामिल हो गए थे। इस बीच दानवे ने यह भी पूछा कि क्या साहित्यिक सम्मेलनों का इस्तेमाल राजनीतिक आरोप लगाने के लिए इस तरह से करना उचित है?

राउत ने आयोजकों से स्पष्टीकरण मांगा
संजय राउत ने टिप्पणियों के संबंध में स्पष्टीकरण की मांग की है। अखिल भारतीय मराठी साहित्य महामंडल की अध्यक्ष उषा तांबे को लिखे अपने पत्र में राउत ने कहा, '98वें साहित्य सम्मेलन में जिन विषयों पर चर्चा की गई, उनका साहित्य से कोई संबंध नहीं था। ऐसा प्रतीत होता है कि यह कार्यक्रम किसी राजनीतिक दबाव में आयोजित किया गया था। साहित्य महामंडल के मंच का घोर दुरुपयोग किया गया।' राउत ने यह भी पूछा कि इस तरह के राजनीतिक झगड़ों की जिम्मेदारी कौन लेगा?
विज्ञापन


संबंधित वीडियो

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें