उदन्त मार्त्तण्ड के 200 वर्ष पूरे हो चुके हैं। वर्ष 1826 में शुभारंभ के बाद पत्रकारिता जगत में गत 200 वर्षों के दौरान पंडित जुगल किशोर से शुरू हुई इस यात्रा में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, उत्तर प्रदेश के कानपुर में रहने वाले गणेश शंकर विद्यार्थी जैसी हस्तियों ने भी अपने अमिट हस्ताक्षर छोड़े। देश की आजादी की लड़ाई के दौरान लोकमान्य बालगंगाधर तिलक ने जैसे पत्रकारिता के दिग्गजों का योगदान भी ऐसा है मानों इन विभूतियों ने अपनी लेखनी से समाज में समाचारों के प्रकाश को फैलाना अपना मिशन बना लिया हो। न्याय, संकल्प और हितों को समर्पित इस यात्रा के बारे में हमारे पूर्वजों के विचार कैसे थे?
महात्मा गांधी ने वर्ष 1925 में यंग इंडिया के अंक में मिशन को लेकर क्या लिखा?
मैंने पत्रकारिता को केवल अपने जीवन के मिशन के रूप में चुना है, न कि पत्रकारिता के लिए। मेरा उद्देश्य संयम बरतते हुए उदाहरण और उपदेश के माध्यम से सत्याग्रह के अद्वितीय हथियार का उपयोग सिखाना है, जो अहिंसा और सत्य का प्रत्यक्ष परिणाम है... इसलिए, अपने विश्वास के प्रति सच्चा रहने के लिए, मैं क्रोध या द्वेष में नहीं लिख सकता। मैं व्यर्थ में नहीं लिख सकता। मैं केवल भावनाओं को भड़काने के लिए नहीं लिख सकता।
गणेश शंकर विद्यार्थी ने वर्ष 1913 के प्रताप में न्याय के बारे में क्या लिखा?
आज अपने हृदय में नई-नई आशाओं को धारण करके आ और अपने आदशों पर पूर्ण विश्वास रखकर प्रताप कर्म क्षेत्र में उतरा है। मानव जाति का कल्याण हमारा परम उद्देश्य है और इसकी प्राप्ति का एक बहुत बड़ा और जरूरी साधन हम भारतवर्ष की उन्नति समझते हैं। हम न्याय में राजा और प्रजा, दोनों का साथ देंगे, परंतु अन्याय में किसी का नहीं। हमारी अभिलाषा है कि विभिन्न जातियों, संप्रदायों और वर्षों में परस्पर मेल-मिलाप बढ़े।
लोकमान्य तिलक ने वर्ष 1905 में प्रकाशित केसरी के अंक में बताई संकल्प की अहमियत
लोगों में जागरूकता पैदा करना और राय बनाने में मदद करना हमारा कर्तव्य है। अगर हम सरकार को नापसंद आने वाला कोई काम नहीं करेंगे, तो दमन खत्म नहीं होगा। सरकार लोगों की राय को घास की तरह कुचल रही है। सैकड़ों-हजारों लोगों को एक ही संकल्प के साथ जुड़ना चाहिए, क्योंकि लोगों की राय की ताकत सिर्फ एकजुट होने में नहीं, बल्कि उनके दृढ़ संकल्प में होती है।
200 साल पहले उदन्त मार्त्तण्ड के अंक में पंडित जुगल किशोर के उद्गार क्या?
यह उदन्त मार्त्तण्ड अब पहले-पहल हिंदुस्तानियों के हित के हेतु, जो आज तक किसी ने नहीं चलाया, पर अंग्रेजी, ओ पारसी ओ बंगाल में जो समाचार का कागज छपता है, उनका सुख उन बोलियों के जानने और पढ़ने वालों को ही होता है और सब लोग पराए सुख से सुखी होते हैं। ऐसी-ऐसी बातों के विचार से, नाना देश के साथ समाचार हिंदुस्तानी लोग देख कर पढ़ ओ समझ लेय ओ पराई अपेक्षा ओ अपने भाषे के उपत न छोड़ें।