आम लोगों के लिए हवाई सफर को किफायती बनाने वाली केंद्र सरकार की उड़ान योजना ने 10 साल पूरे कर लिए हैं। इस दौरान 1.49 करोड़ से अधिक यात्रियों ने योजना के तहत हवाई यात्रा की। नागर विमानन मंत्रालय की ओर से मंगलवार को जारी फैक्टशीट के मुताबिक, योजना के तहत देश के 90 हवाई अड्डों को जोड़ते हुए 625 हवाई मार्गों पर सेवाएं शुरू की गई हैं।
योजना के अगले चरण में 120 नए गंतव्यों को जोड़ने का लक्ष्य है। इससे चार करोड़ अतिरिक्त यात्रियों को किफायती हवाई सफर का लाभ देने की तैयारी है। योजना का उद्देश्य छोटे शहरों और दूरदराज के इलाकों को हवाई नेटवर्क से जोड़ना है।
मंत्रालय के अनुसार, उड़ान योजना से दूरदराज के क्षेत्रों को हवाई संपर्क मिला है। इससे पर्यटन, स्थानीय कारोबार और रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा मिला है। देश में हवाई अड्डों की संख्या 2014 में 74 थी, जो 2024 में बढ़कर 159 हो गई। यानी एक दशक में इनकी संख्या दोगुने से अधिक हो गई। सरकार ने अगले पांच साल में 50 नए हवाई अड्डे विकसित करने का लक्ष्य भी रखा है।
क्षेत्रीय संपर्क योजना (आरसीएस) के तहत उड़ानें संचालित करने वाली एयरलाइंस को लैंडिंग और पार्किंग शुल्क नहीं देना पड़ता। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) इन उड़ानों पर टर्मिनल नेविगेशन लैंडिंग शुल्क भी नहीं लगाता। इसके अलावा, मार्ग नेविगेशन और सुविधा शुल्क में भी छूट दी जाती है। आरसीएस एयरपोर्ट से उड़ान शुरू होने के पहले तीन साल तक विमानन टरबाइन ईंधन (एटीएफ) पर उत्पाद शुल्क अधिकतम दो फीसदी रखा गया है। एयरलाइंस को अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए कोड-शेयरिंग समझौते करने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाता है।