राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) नेता इंद्रेश कुमार ने रविवार को कहा कि समान नागरिक संहिता (यूसीसी) से किसी की धार्मिक पहचान को खतरा नहीं है। उन्होंने कहा कि कुछ नेताओं ने मुसलमानों की अशिक्षा का फायदा उठाकर उन्हें भड़काया है। उन्होंने यह भी कहा कि यूसीसी से इस्लाम और मुसलमानों को कोई खतरा नहीं है।
इंद्रेश ने बताया कि भारत के संविधान और सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया है कि भारत के हर राज्य में विविधता है, इसलिए यूसीसी का गठन राज्य के हिसाब से किया जाना चाहिए। अभी इस पर केंद्रीय कानून बनाने की इजाजत नहीं दी गई है। यह ध्यान में रखा जाना चाहिए कि यूसीसी से किसी की धार्मिक पहचान, जाति पहचान या भाषा को खतरा नहीं है। इससे किसी को कोई खतरा नहीं है। कुछ नेता मुसलमानों को निशाना बनाकर उन्हें भड़काने की कोशिश करते हैं। सवाल यह है कि फिर अन्य समुदायों का क्या होगा? लेकिन मुसलमानों की अशिक्षा का नाजायज फायदा उठाकर उन्हें भड़काया जा रहा है। इससे इस्लाम को कोई खतरा नहीं है। मैं सभी मुसलमानों को विश्वास दिलाता हूं कि यूसीसी उनका सम्मान बढ़ाता है और सुरक्षा की गारंटी देता है ।
भक्ति में नफरत की कोई जगह नहीं
आरएसएस नेता ने आगे कहा कि मुस्लिम समुदाय द्वारा राजस्थान और उत्तर प्रदेश से अयोध्या तक की सात पदयात्राएं मार्च में शुरू होंगी। उन्होंने कहा, 'मुसलमान कहते हैं कि हमें जय श्री राम कहना उतना ही पसंद है जितना हमें अल्लाह हू अकबर कहना पसंद है।' उन्होंने राम मंदिर को लेकर विपक्षी नेताओं की भी तारीफ की और कहा कि भक्ति में नफरत नहीं होनी चाहिए।
राम मंदिर और नाथूराम गोडसे पर उनकी हालिया टिप्पणियों के लिए एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की आलोचना करते हुए, आरएसएस नेता ने कहा कि मुसलमान ओवैसी को आधा फीसदी भी वोट नहीं देते हैं। उन्होंने आगे कहा कि औवेसी टेलीविजन के शहंशाह हैं, देश को ऐसे वायरस से सावधान रहना चाहिए। किसी को भी राम का विरोध नहीं करना चाहिए. अगर आप गोडसे से नफरत करते हैं तो करते रहिए।