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UCC For Tribals: यूसीसी से आदिवासियों को बाहर रखने का एलान, रिजिजू बोले- उन्हें अपनी परंपरा से जीने की आजादी

Sun, 31 Aug 2025 11:13 PM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

केंद्र सरकार ने साफ किया है कि प्रस्तावित समान नागरिक संहिता (यूसीसी) आदिवासी समाज पर लागू नहीं होगी। अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि अनुसूची पांच, अनुसूची छह और पूर्वोत्तर राज्यों के आदिवासी अपनी परंपराओं के अनुसार जीवन जीते रहेंगे।

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किरेन रिजिजू, केंद्रीय मंत्री - फोटो : ANI
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विस्तार
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केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि प्रस्तावित समान नागरिक संहिता (यूसीसी) देश के आदिवासी समाज पर लागू नहीं होगी। अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने रविवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े वनवासी कल्याण आश्रम के एक कार्यक्रम में यह घोषणा की। उन्होंने कहा कि आदिवासियों को उनकी परंपराओं और मान्यताओं के अनुसार जीने की स्वतंत्रता दी जाएगी।
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रिजिजू ने कहा कि कुछ लोग सोशल मीडिया पर केंद्र सरकार के खिलाफ भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। वह गलत माहौल बनाकर यह संदेश दे रहे हैं कि यूसीसी लागू होने पर आदिवासियों की संस्कृति खत्म हो जाएगी। लेकिन सरकार का रुख बिल्कुल साफ है कि यूसीसी अनुसूची पांच, अनुसूची छह, पूर्वोत्तर और अन्य आदिवासी इलाकों में लागू नहीं होगी।

संविधान के अनुरूप यूसीसी पर विचार
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भाजपा और केंद्र सरकार संविधान के अनुच्छेद 44 के अनुसार यूसीसी लागू करने पर विचार कर रही है। उन्होंने तर्क दिया कि जब आपराधिक कानून पूरे देश में सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होता है तो सिविल कानून भी सभी के लिए समान होना चाहिए।
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रिजिजू ने आगे यह जानकारी भी दी कि कुछ राज्य इस दिशा में कदम बढ़ा चुके हैं। उत्तराखंड में पहले ही समान नागरिक संहिता लागू हो चुकी है। उन्होंने दोहराया कि केंद्र सरकार आदिवासी समुदाय की परंपराओं और अधिकारों को सुरक्षित रखने के लिए प्रतिबद्ध है और उनके क्षेत्रों को यूसीसी से बाहर रखा जाएगा।

विधि आयोग कर रहा विचार
इस समय विधि आयोग पूरे देश में यूसीसी पर अध्ययन कर रहा है। आयोग विभिन्न समुदायों और हितधारकों से सुझाव ले रहा है। माना जा रहा है कि आयोग की रिपोर्ट आने के बाद इस पर आगे निर्णय लिया जाएगा। रिजिजू के इस बयान से यह स्पष्ट हो गया है कि केंद्र सरकार आदिवासी समाज की चिंताओं को लेकर गंभीर है।
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जानें क्या है यूसीसी
समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी देश में एक समान सिविल कानून लागू करने का प्रस्ताव है। इसका मतलब यह होगा कि शादी, तलाक, गोद लेने, उत्तराधिकार और गुजारे भत्ते से जुड़े नियम सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होंगे, चाहे उनका धर्म कोई भी हो। अभी तक इन मामलों में अलग-अलग धार्मिक कानून चलते हैं। यूसीसी पर सबसे बड़ी बहस 1985 के शाहबानो केस के बाद शुरू हुई। इसमें मुस्लिम पर्सनल लॉ और शरिया से जुड़े मुद्दों ने पूरे देश का ध्यान खींचा। इसके बाद दो बार 2019 और 2020 में संसद में बिल लाने की कोशिश हुई, लेकिन उसे वापस ले लिया गया।



 
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