सार
सुप्रीम कोर्ट ने यूएपीए मामलों में भी कहा कि जमानत नियम, जेल अपवाद है। अदालत ने नार्को-आतंक केस में आरोपी सैयद इफ्तिखार अंद्राबी को जमानत देते हुए कहा कि धारा 43डी(5) अनिश्चितकालीन कैद का आधार नहीं बन सकती और अनुच्छेद 21 सर्वोपरि है।
सुप्रीम कोर्ट ने आज कहा कि गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के मामलों में भी 'जमानत नियम है और जेल अपवाद'। शीर्ष अदालत ने जम्मू-कश्मीर के एक व्यक्ति को जमानत दे दी, जो नार्कों आतंक मामले में मुकदमे का सामना कर रहा था।
आरोपी को मिली जमानत
जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने हैंडवाड़ा निवासी सैयद इफ्तिखार अंद्राबी को राहत दी। अदालत ने अंद्राबी को अपना पासपोर्ट जमा करने और हर पंद्रह दिन में स्थानीय पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट करने का निर्देश दिया। अंद्राबी पर सीमा पार से मादक पदार्थों की तस्करी और जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के वित्तपोषण में शामिल होने का आरोप है।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) 2020 से यूएपीए और भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत इस मामले की जांच कर रही है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि यूएपीए की धारा 43डी(5) अनिश्चितकालीन कारावास को उचित नहीं ठहरा सकती और इसे अनुच्छेद 21 और 22 के अधीन होना चाहिए।