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विवादों के बीच शिक्षा की मजबूत बुनियाद डालने की कोशिश में एचआरडी मंत्रालय

Wed, 25 May 2016 01:42 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली

सार

  • स्कूल और उच्चतर शिक्षा में सबको गुणवता
  • तकनीक युक्त पढ़ाई मुहैया करवाने स्मृति की प्राथमिकता 
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स्मृति ईरानी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय, हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी के विवादों के बीच मोदी सरकार की युवा केंद्रीय शिक्षा मंत्री स्मृति ईरानी स्कूल से लेकर उच्चतर शिक्षा को मजबूत बुनियाद देने में जुटी हैं। डिग्री विवाद, विश्वविद्यालयों में दखल से लेकर रोहित वेमूला मामले पर संसद में बेशक स्मृति भावुक हुई हो लेकिन आम व पिछड़े व दूर-दराज के बच्चों तक तकनीक और गुणवता युक्त शिक्षा पहुंचाने में मानव संसाधन विकास मंत्रालय लगातार कोशिश में जुटा है।
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दो साल के कार्यकाल में बेशक कई स्पीड ब्रेकर आए हों, लेकिन ग्रासरूट पर बदलाव दिख रहे हैं। मोदी सरकार के सबसे चर्चित चेहरे या स्मृति ईरानी ने स्कूल और उच्च शिक्षा को दो भागों में बराबर बदलाव की योजना बनायी।

स्मृति की सबसे बड़ी उपलब्धि नई शिक्षा पालिसी होगी। क्योंकि वर्षों से शिक्षा की पद्धति में बदलाव न होने के चलते गुणवता का स्तर लगातार गिर रहा था। हालांकि सरकार अभी आठवीं कक्षा में दोबारा बोर्ड परीक्षा शुरू करने की राज्यों की मांग पर कोई फैसला नहीं कर सकी है। हालांकि प्रौद्योगिकी, तकनीक से लेकर आम छात्रों को स्वावलंबी बनाने के लिए स्कूली स्तर पर कई योजनाएं बन रही हैं। दुनिया के सर्वश्रेष्ठ सौ शिक्षण संस्थानों में शामिल होने का जज्बा  लेकर मंत्रालय ने ज्ञान को भी शुरू किया है, जिसमें दुनियाभर के विश्वविद्यालय अपने ज्ञान को सांझा कर रहे हैं। वहीं, स्कूली बच्चों को ई-शिक्षा से जोड़ा है, ताकि वे ऑनलाइन जानकारियां हासिल कर सकें।
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ये हैं स्मृति के मंत्रालय की महत्वपूर्ण योजनाएं :  

स्मृति ईरानी - फोटो : PTI
- शिक्षा पालिसी का ड्राफ्ट तैयार किया गया है, जिसमें एक लाख से अधिक गांवों ने अपनी शिक्षा पद्धति में बदलाव में प्रारूप भेजा है। शहरों और गांवों की मांग के आधार पर नई शिक्षा नीति जल्द लागू होगी। 

- देशभर में गिरते लिंगानुपात को ठीक करने के लिए बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना के तहत स्कॉलरशिप देकर छात्राओं को शिक्षा से जोड़ा जा रहा है। 

- आधी आबादी व दिव्यांगों को उच्च शिक्षा से जोड़ने के लिए पीएचडी व एमफिल में विश्वविद्यालय बदलने समेत दो से एक साल अतिरिक्त देने का मौका मिला। मातृत्व अवकाश तीन महीने से 240 दिनों तक छुट्टी की शुरुआत की गयी। 

- सरकारी स्कूली बच्चों को दाखिला दिलवाने, पढ़ाई, ड्रॉपआउट, परफारमेंस पर नजर रखने के लिए आधार कार्ड या यूनिक नंबर से रियल टाइम मॉनेटरिंग होगी। 

- राष्ट्रीय अविष्कार योजना के तहत इस साल से सरकारी स्कूलों के तकनीक व प्रौद्योगिकी के आविष्कार के तहत गूगल के कोड टू लर्न में भाग लेंगे। 

- इंजीनियरिंग, मेडिकल में दाखिले को कोचिंग सेंटर से छात्रों को दूर रखने के लिए मंत्रालय  स्वयं पोर्टल तैयार कर रहा है। 

- स्वच्छ विद्यालय के तहत देशभर में महज एक साल में 4.17 लाख शौचालय बनाए गए हैं। 

- पिछड़े व गरीब छात्रों को शिक्षा से जोड़ने और कुपोषण से दूर रखने के लिए मिड डे मील में अंडा, दूध व केला शामिल करने की योजना  है। मंत्रालय प्रतिदिन इंडीग्रेटिड वाइस रिस्पॉस सिस्टम से स्कूलों में बच्चों ने खाना खाया या नहीं की जानकारी ले सकेगा। 

- इंनोवेशन और रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए विवि में छात्र स्टार्ट अप इंडिया में अपना बिजनेस शुरू कर सकेंगे। 
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ये हैं विवाद

जेएनयू कैंपस
- हैदराबाद यूनिवर्सिटी  में पीएचडी स्कॉलर्स सुसाइड मामला और जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में देशविरोधी नारे मामले में मंत्रालय के दखल के आरोप लगे। 

- यूजीसी में स्कॉलरशिप कम करने के मामले में स्मृति ईरानी को छात्रों ने घेरा। 

- आईआईएम बिल के नाम पर भी मंत्रालय विवादों में रहा। आईआईएम प्रबंधन आईआईटी  की तर्ज पर अपनी काउंसिल चाहता था, ताकि मंत्रालय कोई दखल न दें।

- विश्वविद्यालयों व स्कूलों में योग दिवस पर सूर्य नमस्कार केचलते विवाद उठा। 

- दिल्ली विश्वविद्यालय में चार वर्षीय डिग्री प्रोग्राम को तीन वर्षीय डिग्री प्रोग्राम में तब्दील किया। 
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