मच्छर जनित रोग डेंगू वायरस के दो स्ट्रेन आपस में मिक्स हुए हैं। इसका मतलब यह है कि एक ही मरीज में दो अलग अलग स्ट्रेन का संक्रमण हो रहा है जो इससे पहले कभी देखने को नहीं मिला।
यह जानकारी नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) की रिपोर्ट में सामने आई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से साझा की गई इस रिपोर्ट के अनुसार, आमतौर पर डेंगू के चार स्ट्रेन होते हैं जिनमें डेन 1, डेन 2, डेन 3 और डेन 4 शामिल हैं। अभी तक डेंगू मरीजों में यह चार तरह का स्ट्रेन पाया गया लेकिन पहली बार साल 2021 में डेंगू का मिक्स स्ट्रेन सामने आया। कुल मरीजों में 5.60% मिक्स स्ट्रेन से संक्रमित पाए गए। जब मिक्स स्ट्रेन की जांच हुई तो पता चला कि इनमें डेन 2 और डेन 4 मौजूद था। यह वही साल था जिसमें भारत ने कोरोना की दूसरी यानी डेल्टा लहर का सामना किया। यहां गौर करने वाली बात है कि 2022 में मिक्स स्ट्रेन का एक भी मामला नहीं मिला लेकिन 2023 में नया मिक्स स्ट्रेन करीब 3.5 गुना ज्यादा मरीजों में पाया गया। यह नया स्ट्रेन डेन 1 और डेन 3 ने मिलकर पैदा किया। इसी 2023 में डेंगू के कुल 94198 संक्रमित मरीज मिले जिनमें से 91 मरीजों ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया।
तीन साल में डेंगू का बदला पैटर्न
रिपोर्ट के अनुसार डेंगू वायरस के पैटर्न में भी बड़ा बदलाव हुआ है। आंकड़े बताते हैं कि 2019 में 1,57,315 लोग डेंगू की चपेट में आए जिनमें 166 मरीजों की मौत हुई। इनमें सर्वाधिक 83.30% मरीजों में वायरस का डेन 1 स्ट्रेन पाया गया। इसी तरह 2020 में डेंगू के कुल मामले 44,585 और 56 मौतें दर्ज की गईं। इनमें से 77.80% डेन 1 स्ट्रेन का पता चला लेकिन साल 2021 में कुल 1,93,245 और 346 मौतें हुई जिसमें सर्वाधिक 66.60% मामले डेन 2 स्ट्रेन मिला है। तब से यह अभी तक सबसे ज्यादा देखा जा रहा है। साल 2022 में सामने आए कुल 2,33,251 मामले और 303 मौत में सर्वाधिक 69.20% और 2023 में कुल 94198 में से 50% में डेन 2 स्ट्रेन पाया गया।
वैज्ञानिकों ने चिंता जताते हुए कहा है कि डेंगू संक्रमण के मामले पूरे देश में एक जैसे दिखाई नहीं दे रहे हैं। साल 2023 का ट्रेंड बता रहा है कि अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग तरह का डेंगू वायरस मिल रहा है। इसलिए देश के सभी हिस्सों में डेंगू मरीजों के क्लीनिक आउटकम की बारीकी से निगरानी होनी चाहिए ताकि इस बदलते पैटर्न को समझकर डेंगू प्रबंधन पर काम किया जाए। रिपोर्ट के अनुसार, डेंगू के सभी सीरोटाइप में से डेन 2 अन्य की तुलना में अधिक खतरनाक है क्योंकि इसमंे मरीज को रक्तस्रावी बुखार और डेंगू शॉक सिंड्रोम का जोखिम काफी ज्यादा होता है।
चिंता की यह है वजह
वैज्ञानिकों ने चिंता जताते हुए कहा है कि डेंगू संक्रमण के मामले पूरे देश में एक जैसे दिखाई नहीं दे रहे हैं। साल 2023 का ट्रेंड बता रहा है कि अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग तरह का डेंगू वायरस मिल रहा है। इसलिए देश के सभी हिस्सों में डेंगू मरीजों के क्लीनिक आउटकम की बारीकी से निगरानी होनी चाहिए ताकि इस बदलते पैटर्न को समझकर डेंगू प्रबंधन पर काम किया जाए। रिपोर्ट के अनुसार, डेंगू के सभी सीरोटाइप में से डेन 2 अन्य की तुलना में अधिक खतरनाक है क्योंकि इसमंे मरीज को रक्तस्रावी बुखार और डेंगू शॉक सिंड्रोम का जोखिम काफी ज्यादा होता है।