तेजाब से नहा जाने के बाद दो लोगों की हुई मौत।
तेजाब के केन से लदे टेंपो की बुग्गी के साथ जबरदस्त टक्कर होने से टेंपो में सवार दो युवक तेजाब में नहा गए। कुछ ही देर बाद दोनों ने दम तोड़ दिया। दोनों एक केमिकल फैक्ट्री में काम करते थे, जिसके लिए वह तेजाब लेकर जा रहे थे। मौत की सूचना पर कोहराम मच गया। सूचना पर परिजन जिला अस्पताल पहुंचे।
जेल चुंगी निवासी सोनू (38) पुत्र यशपाल टेंपो चलाता है, जो काफी समय से एक केमिकल फैक्ट्री के लिए काम कर रहा था। बुधवार को वह फैक्ट्री के ही मजदूर पुवांरका निवासी संदीप (35) के साथ देहरादून रोड पर टेंपो में तेजाब से भरे केन लादकर शहर की ओर आ रहा था। दोपहर करीब ढाई बजे दोनों बुरी तरह से जख्मी हालत में नौगजा पीर के पास सड़क किनारे पड़े मिले।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार उनके टेंपो की एक बुग्गी के साथ पीछे से जोरदार टक्कर हुई, जिसमें बुग्गी चालक को भी चोट आई। चूंकि टेंपो में तेजाब के केन भी रखे थे। ऐसे में तेजाब उछलकर दोनों के ऊपर आ गिरा था। गंभीर चोट के साथ ही दोनों तेजाब में बुरी तरह से झुलस गए थे। ऐसे में कोई व्यक्ति उन्हें उठाकर अस्पताल भेजने की हिम्मत नहीं जुटा सका।
मौके पर मौजूद मनीष अरोड़ा आदि ने तुरंत 108 पर कॉल कर एंबुलेंस को बुलाया, जिसके बाद दोनों को जिला अस्पताल भेजा गया। मगर दोनों ने बीच रास्ते में ही दम तोड़ दिया। दोनों शवों को मोर्चरी में रखवा दिया गया। सूचना मिलते ही थाना गागलहेड़ी की पुलिस भी जिला अस्पताल पहुंची और पंचनामा भरा। केमिकल फैक्ट्री का मालिक भी जिला अस्पताल पहुंचा था, जिसने मृतकों के परिजनों को फोन पर सूचना दी। कुछ ही देर बाद मृतकों के परिजन रोते-बिलखते जिला अस्पताल पहुंचे।
... तो बच सकती थी जान
देहरादून रोड पर उद्योग चलाने वाले उद्यमी मनीष अरोड़ा को जब हादसे का पता चला तो वह अपने साथियों के साथ घटना स्थल पर पहुंचे। बकौल मनीष उन्होंने एंबुलेंस बुलाने के लिए 108 पर कई बार कॉल किया। बताया कि घटना के बाद एक व्यक्ति की मौत हो चुकी थी, मगर दूसरे में सांस चल रही थी। आरोप है कि फोन करने के करीब पौन घंटे बाद एंबुलेंस मौके पर पहुंची, जिसकी वजह से दूसरे व्यक्ति की भी मौत हो गई। यदि एंबुलेंस समय से पहुंचती तो एक व्यक्ति की जान बच सकती थी।
सड़क भी बनी हादसे की वजह
सहारनपुर से नौगजा पीर तक सड़क वन-वे है, मगर नौगजा पीर के बाद सड़क की चौड़ाई मुश्किल से 14 फुट रह जाती है, जिसपर दोनों ओर से आने वाले वाहनों का भार रहता है। सड़क की चौड़ाई कम होने की वजह से ही टेंपो की बुग्गी में टक्कर लगी, जिसकी वजह से दो लोगों के अपनी जान से हाथ धोना पड़ा।
मां को कल ही कराया था भर्ती
हादसे में मारे गए सोनू के पिता नहीं हैं। मां विमला दिल की मरीज है। मंगलवार को अचानक से विमला को दिल का दौरा पड़ा था, जिसके बाद सोनू और अन्य बेटों ने उसे जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया था। सोनू मां से बुधवार शाम को देखने आने की बात कहकर काम पर निकला था। मगर अपराह्न करीब तीन बजे सोनू की लाश इमरजेंसी वार्ड पहुंची। अस्पताल के बेड पर लेटी विमला को जब बेटे की मौत का पता चला तो वह बेड छोड़कर बाहर आकर फूट-फूटकर रोने लगी।