सार
असम में पहली बार 40 वर्षीय की एक महिला समेत दो लोगों को नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के तहत नागरिकता दी गई। महिला 2007 में बांग्लादेश से आई थी, जबकि पुरुष 1975 में आए थे। गृह मंत्रालय ने सर्टिफिकेट जारी कर नागरिकता उनके भारत आगमन के दिन से प्रभावी मानी।
असम में पहली बार एक महिला समेत दो लोगों को नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के तहत नागरिकता दी गई है। इन दो लोगों को मिले नागरिकता के बाद अब राज्य में इस कानून के तहत नागरिकता पाने वाले लोगों की संख्या चार हो गई है। सूत्रों के अनुसार भारत की नागरिकता पाने वाली 40 साल की महिला 2007 में बांग्लादेश से भारत आई थी और श्रीभूमि में रह रही थी। दूसरी ओर 61 वर्षीय पुरुष जो 1975 में भारत आए थे और काछार में रहते थे उन्हें भी नागरिकता मिली। उन्हें नेचुरलाइजेशन प्रक्रिया के तहत नागरिकता दी गई।
मामले में वरिष्ठ वकील देब ने बताया कि गृह मंत्रालय ने शुक्रवार को सर्टिफिकेट जारी किए और नागरिकता उस दिन से प्रभावी मानी जाएगी जिस दिन दोनों व्यक्ति भारत में आए थे, हालांकि उन्होंने संभावित सामाजिक उत्पीड़न का हवाला देते हुए उनके नाम बताने से इनकार कर दिया।
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कैसे भारत पहुंची बांग्लादेशी महिला?
बता दें कि बांग्लादेश के चटगांव की रहने वाली महिला सिलचर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में इलाज के लिए परिवार के एक सदस्य के साथ आई थी। इस दौरान वह श्रीभूमि के एक व्यक्ति से मिली और उससे शादी कर ली, इसके बाद उसने एक बेटे को जन्म दिया और वो वहीं रुक गई। जानकारी के अनुसार पिछले साल जुलाई में दिया गया उसका पहला आवेदन लोकसभा चुनावों से पहले परिसीमन अभ्यास के कारण हुई भ्रम की स्थिति के कारण खारिज कर दिया गया था। हालांकि वकील देब ने दोबारा आवेदन किया और आखिरकार उसका मामला मंजूर हो गया।
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11 साल की उम्र में भारत आया था व्यक्ति
वहीं अब बात अगर भारत का नागरिकता पाने वाले 75 वर्षीय व्यक्ति की करें तो, 11 साल की उम्र में बांग्लादेश के मौलवीबाजार जिले से भारत आया व्यक्ति कछार में रहता था। उन्होंने वहीं स्थानीय स्तर पर शादी की और अपना परिवार बसाया। इस दूसरे लाभार्थी को यह नागरिकता नेचुरलाइजेशन प्रक्रिया के जरिए मिली। बता दें कि असम में अब कुल चार ऐसे लोग हो गए हैं जो 1971 की कट-ऑफ तारीख के बाद भारत आए थे और उन्हें नागरिकता (संशोधन) अधिनियम के तहत नागरिकता दी गई है।
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