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महाराष्ट्र: UAPA से दो मुस्लिम युवा बरी, जेल से बाहर आने पर दोनों बोले- सलाखों के पीछे नौ साल बिताने का अफसोस

Fri, 18 Jun 2021 01:16 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

कोर्ट से रिहा होने के बाद मोहम्मद इलियास और मोहम्मद इरफान ने कहा कि नौ साल जेल में गुजारने का अफसोस है। दोनों को अदालत ने  गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम सहित सभी आरोपों से बरी कर दिया।
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UAPA के तहत गिरफ्तार हुए दो लोग बरी हुए - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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महाराष्ट्र के नांदेड़ में  2012 में UAPA के तहत गिरफ्तार किए गए मोहम्मद इलियास (38) और मोहम्मद इरफान (33) को मंगलवार रात रिहा कर दिया गया। दोनों को अदालत ने गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम सहित सभी आरोपों से बरी कर दिया। रिहा होने के बाद मोहम्मद इलियास ने कहा कि उन्हें अपने 9 साल गवाने का अफसोस है। इलियास , इरफान समेत पांच लोगों को महाराष्ट्र एटीएस ने 31 अगस्त 2012 को नांदेड़ से गिरफ्तार किया था। इन पर हिंदू नेताओं और पत्रकारों की हत्या की साजिश रचने का आरोप था।

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तीन अन्य आरोपियों को 10 साल की सजा
मंगलवार को मुंबई की विशेष एनआईए अदालत ने तीन अन्य मोहम्मद अकरम, मोहम्मद मुजम्मिल और मोहम्मद सादिक को यूएपीए और आर्म्स एक्ट के तहत दोषी ठहराया और उन्हें 10 साल की सजा सुनाई।

सबूत के अभाव में दोनों युवा बरी
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने इस मामले की जांच शुरू की थी, लेकिन सबूत के अभाव में अदालत ने इरफान और इलियास को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि दोनों के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं मिले । जिस आधार पर दोनों को बरी किया जा रहा है। गिरफ्तार होने से पहले इलियास नांदेड़ में फलों का कारोबार करता था। वहीं इरफान की खुद की इन्वर्टर की बैटरी की दुकान थी। पिछले नौ वर्षों में उन्होने कई जमानत के आवेदन किए। इस दौरान न तो एटीएस और न ही एनआईए ने उनके खिलाफ कोई सबूत पेश किए।
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बरी होने के बाद इलियास ने दिया जवाब
कोर्ट से बरी होने के बाद इलियास ने कहा कि कोई आश्चर्य की बात नहीं है, क्योंकि उन्हें पता था कि उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं है। “मेरी गिरफ्तारी के समय मेरा बच्चा दो सप्ताह का था। गिरफ्तारी के चलते मेरे व्यवसाय को बंद करना पड़ा क्योंकि मकान मालिक ने हमें परिसर खाली करने के लिए कहा था। यह जानते हुए भी कि मेरे खिलाफ मामला कमजोर है, मैं उच्च न्यायालयों में अपनी जमानत याचिकाओं पर अनुवर्ती कार्रवाई नहीं कर सका

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