दिल्ली चुनाव में रोजाना ही कुछ नया देखने को मिल रहा है। किसी दल को अपनी रणनीति बदलनी पड़ रही है तो किसी पार्टी को अपने तय चुनावी मुद्दों से दूर हटना पड़ रहा है। बुधवार का दिन भी कुछ ऐसा ही रहा। एक ही दिन में मोदी-शाह की जोड़ी ने दो दो मास्टर स्ट्रोक जड़ दिए। एक तरफ तो बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दिल्ली में अमित शाह के साथ चुनाव प्रचार के लिए तैयार हो गए तो दूसरी ओर शाम होते होते अकाली दल ने भी भाजपा को समर्थन देने का ऐलान कर दिया।
यह कहा जाता है कि दिल्ली में करीब 25 से 30 फीसदी पूर्वांचली वोटर हैं। यानी बिहार, यूपी और झारखंड के वोटरों की संख्या 25-27 सीटों पर निर्णायक भूमिका में रहती है। पंजाबी वोटर भी करीब 30 फीसदी हैं, लेकिन ये दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में फैले हैं।सिख वोटरों की बात करें तो चार सीटों पर ये बाहुल्य वाली स्थिति में हैं। अकाली दल के साथ आने से अब भाजपा को कुछ उम्मीद बंधी है कि सिख वोटर उनके पक्ष में आ सकते हैं।
बता दें कि 2015 के चुनाव में पूर्वांचली वोटर कांग्रेस से शिफ़्ट होकर आम आदमी पार्टी की तरफ आ गए थे।भाजपा ने इन वोटरों को अपने पक्ष में करने के लिए मनोज तिवारी को दिल्ली प्रदेश का अध्यक्ष बना दिया।चूंकि अभी तक पूर्वांचली वोटरों में आप का खासा प्रभाव माना जाता है, इसलिए भाजपा ने तिवारी के साथ साथ कई दूसरे पूर्वांचली नेताओं को चुनाव प्रचार में उतारा है। इन्हीं वोटरों में बिहार के लोगों की भी अच्छी खासी तादाद है, इसलिए अब भाजपा ने नीतीश कुमार को चुनाव प्रचार के लिए राजी कर लिया है।
वे भी फरवरी के पहले सप्ताह में अमित शाह के साथ दिल्ली में चुनाव प्रचार करेंगे। भाजपा नेताओं का कहना है कि नीतीश कुमार के दौरे का कार्यक्रम तय किया जा रहा है। पार्टी का प्रयास है कि वे शाह के मंच के अलावा भी बिहार के लोगों के बाहुल्य वाले क्षेत्रों में भी प्रचार करें। पूर्वांचली आबादी वाले इलाकों में आदर्श नगर, पालम, बदरपुर, बादली, बराड़ी, कौंडली, संगम विहार, करावल नगर, किराड़ी, लक्ष्मी नगर, मुस्तफाबाद, पटपड़गंज, रिठाला, त्रिलोकपुरी, उत्तम नगर और विकासपुरी आदि शामिल हैं।
दूसरी ओर, पंजाबी आबादी भी 30-35 फीसदी बताई गई है। हालांकि यह आबादी किसी एक क्षेत्र में नहीं है।दिल्ली के अलग अलग इलाकों में इस समुदाय के लोग रहते हैं। ये फैलाव वाली स्थिति में हैं।इसके बावजूद 28-30 सीटों पर इनकी निर्णायक भूमिका रहती हैं। राजौरी गार्डन, हरिनगर, कालकाजी व दूसरे कई क्षेत्रों में सिखों की बड़ी आबादी है। 10-15 सीटों पर सिख वोटर भी चुनाव समीकरण को बदल सकते हैं।
1984 के सिख विरोधी दंगों के चलते यह समुदाय अभी तक भाजपा की तरफ रहा है, लेकिन पिछले चुनाव में आप ने इस समुदाय में बड़ी सेंध लगा दी थी। सीएए मुद्दे को लेकर अकाली दल और भाजपा के बीच कुछ दूरी पैदा हो गई थी, लेकिन बुधवार को सुखबीर सिंह बादल ने भाजपा के समर्थन का ऐलान कर दिया है। इससे भाजपा को काफी राहत महसूस हुई है। पार्टी का मानना है कि सिख बाहुल्य और पंजाबी समुदाय के प्रभाव वाले क्षेत्रों में भाजपा उम्मीदवारों का प्रदर्शन अच्छा रहेगा।