पश्चिम एशिया संकट के बीच मंगलौर पोर्ट पर कच्चे तेल से लदे दो बड़े जहाजों ने दस्तक दी है। अफ्रीका और रूस से आए इन दोनों जहाजों में कुल मिलाकर 1.85 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा कच्चा तेल मौजूद है। इससे मंगलौर रिफाइनरी की ताकत बढ़ेगी।
युद्ध की आग में जल रहे पश्चिम एशिया की वजह से दुनिया भर में तेल की भारी कमी होती जा रही है। ईरान ने होर्मुज का समुद्री रास्ता बंद कर दिया है। इस बीच, कर्नाटक के न्यू मंगलौर पोर्ट पर औद्योगिक गतिविधियों में जबरदस्त तेजी देखने को मिल रही है। यहां दो और विशालकाय कच्चे तेल से लदे जहाज पहुंच चुके हैं। इस बड़ी खेप के आने से 'मंगलौर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड' (MRPL) के लिए कच्चे तेल की हालिया सप्लाई काफी मजबूत हो गई है। अफ्रीका और रूस से आए इन दोनों जहाजों में कुल मिलाकर 1.85 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा कच्चा तेल मौजूद है।
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सोमवार को ही पहुंचा पहला जहाज
जानकारी के मुताबिक, इस कड़ी में पहला जहाज 'सनराइज वे' सोमवार को ही यहां पहुंच गया था। यह जहाज अपने साथ अफ्रीका के मांडजी से कुल 88,152 मीट्रिक टन कच्चा तेल लेकर आया है। खबर लिखे जाने तक जहाज से तेल खाली करने का काम तेजी से चल रहा है।
इसी बीच, समंदर की लहरों को चीरता हुआ एक और बड़ा टैंकर 'नागार्जुन' भी न्यू मंगलौर पोर्ट के सिंगल पॉइंट मूरिंग पर पहुंच चुका है। अधिकारियों ने बताया कि यह जहाज रूस के प्रिमोर्स्क पोर्ट से रवाना हुआ था। इसमें 97,354 मीट्रिक टन कच्चा तेल लदा हुआ है। इस जहाज से तेल को उतारने का काम आज यानी 1 अप्रैल से ही शुरू किया जाना तय हुआ है।
'देशभक्त' भी पहुंचेगा मंगलौर
बात सिर्फ यहीं खत्म नहीं होती। पोर्ट अथॉरिटी ने एक और अच्छी खबर देते हुए बताया कि आने वाले 3 अप्रैल को 'देशभक्त' नाम का एक और बड़ा टैंकर यहां पहुंचने वाला है। इस तेल की सप्लाई भी सीधे एमआरपीएल को ही की जाएगी। कुल मिलाकर देखा जाए तो बैक-टू-बैक आ रहे इन तेल के जहाजों से इलाके में औद्योगिक हलचल काफी बढ़ गई है।