राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने हेरोइन जब्दी के सिलसिले में दिल्ली ते दो आरोपियों हरप्रीत सिंह तलवार और प्रिंस शर्मा को गिरफ्तार किया है। पिछले साल सितंबर में गुजरात के मुंद्रा पोर्ट से 2,988 किलोग्राम हेरोइन जब्त की गई थी। हेरोइन की तस्करी समुद्री मार्ग से अफगानिस्तान से आयात की खेपों के जरिए की जा रही थी।
जांच एजेंसी ने पहले दिल्ली के व्यवसायी हरप्रीत तलवार से पूछताछ की और उसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया। हरप्रीत तलवार दिल्ली के सम्राट होटल में प्लेबॉय क्लब का मालिक है। उसकी गिरफ्तारी मुंद्रा बंदरगाह से 2,988 किलोग्राम हेरोइन जब्ती के संबंध में की गई है, जिसमें विदेशी नागरिकों को केप की खरीद और डिलीवरी भी शामिल थी।
सूत्रों के मुताबिक, वह अफगानों के जरिए ड्रग्स की खरीद रहा था और दुबई के जरिए उन्हें पैसे भेज रहा था। रिफाइंड ड्रग्स को कथित तौर पर व्यवसायी द्वारा परिचालित किया जाता था, जबकि ड्रग्स का दूसरा हिस्सा पंजाब को जाता था।
एनआईए ने इससे पहले अपनी चार्जशीट में इस मामले से जुड़े 16 आरोपियों का जिक्र किया था। एनआईए के एक सूत्र ने कहा, "एजेंसी को संदेह है कि तस्करी की आय को आतंकी गतिविधियों की फंडिंग के लिए अफगानिस्तान वापस भेज दिया गया था। आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिद्दीन के साथ भी संबंधों की जांच की जा रही है।
एल्गार परिषद मामला : एनआईए ने हनी बाबू की जमानत याचिका का विरोध किया
एनआईए ने गुरुवार को बॉम्बे हाईकोर्ट में एल्गार परिषद-माओवादी लिंक मामले के आरोपी प्रोफेसर हनी बाबू की जमानत याचिका का विरोध किया। एजेंसी ने तर्क दिया कि उन्होंने नक्सलवाद को बढ़ावा देने के लिए गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लिया और वह सरकार को उखाड़ फेंकना चाहते थे।
न्यायमूर्ति एन.एम. जामदार और न्यायमूर्ति एन.आर. बोरकर की खंडपीठ हनी बाबू की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
एनआईए की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) अनिल सिंह पेश हुए। उन्होंने अदालत को बताया कि बाबू प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन भाकपा (माओवादी) के सदस्य थे और वह अन्य आरोपियों के साथ लगातार संपर्क में थे।
केंद्रीय एजेंसी के वकील ने कहा कि हनी बाबू नक्सलवाद को बढ़ावा देना चाहते थे और उसका विस्तार करना चाहते थे। वह चुनी हुई सरकार को उखाड़ कर भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने की साजिश का हिस्सा थे।
सिंह ने अदालत को बताया कि वह दूसरों के साथ सशस्त्र संघर्ष के माध्यम से जनता सरकार या लोगों की सरकार स्थापित करना चाहता थे। एएसजी ने आगे तर्क दिया कि बाबू फोन टैपिंग से बचने के लिए संगठन के अन्य सदस्यों को प्रशिक्षित करते थे। अदालत में शुक्रवार को भी याचिका पर सुनवाई जारी रहेगी।
दिल्ली विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर हनी बाबू को इस मामले में जुलाई 2020 में गिरफ्तार किया गया था और वर्तमान में वह नवी मुंबई की तलोजा जेल में बंद हैं। एनआईए ने बाबू पर भाकपा (माओवादी) नेताओं के निर्देश पर माओवादी गतिविधियों और विचारधारा के प्रचार में सह-साजिशकर्ता होने का आरोप लगाया है।
मामला 31 दिसंबर 2017 को पुणे के शनिवारवाड़ा में आयोजित 'एल्गार परिषद सम्मेलन' दिए गए कथित भड़काऊ भाषणों से संबंधित हैं, जिसको लेकर पुलिस ने दावा किया थाकि शहर के भीमा-कोरेगांव युद्ध स्मारक के पास अगले दिन हिंसा हुई। पुणे पुलिस ने दावा किया था कि इस सम्मेलन को माओवादियों का समर्थन प्राप्त था।
मामले की जांच में एक दर्जन से अधिक कार्यकर्ताओं और शिक्षाविदों को आरोपी बनाया गया। बाद में मामले को एनआईए को स्थानांतरित कर दिया गया था।