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मणिपुर में दोहरे बंद से जनजीवन ठप: दो हिंसक घटनाओं के बाद भड़का आक्रोश, कई जिलों में अशांति का माहौल

Tue, 21 Apr 2026 08:59 AM IST
Riya Dubey न्यूज डेस्क, अमर उजाला

सार

मणिपुर में इस महीने हुई दो हिंसक घटनाओं के बाद हालात तनावपूर्ण हैं। बिष्णुपुर में बम हमले में दो बच्चों की मौत और लिटन गांव के पास एक रिटायर्ड सैनिक की हत्या के विरोध में अलग-अलग बंद बुलाए गए हैं। दोहरे बंद के कारण कई जिलों में बाजार, स्कूल और परिवहन सेवाएं प्रभावित हुईं।
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मणिपुर में तनाव - फोटो : ANI
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विस्तार
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मणिपुर के कई पहाड़ी और घाटी जिलों में इस महीने हुई दो अलग-अलग संदिग्ध उग्रवादी हमलों की घटनाओं के बाद हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। इन घटनाओं से संबंधित दोहरे बंद के कारण राज्य के कई हिस्सों में सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। बाजार बंद रहे, शैक्षणिक संस्थान नहीं खुले और सार्वजनिक परिवहन सड़कों से गायब रहा।

क्या है मामला?

पहली घटना 7 अप्रैल को बिष्णुपुर जिले के ट्रोंग्लाओबी इलाके में हुई थी। यहां देर रात एक घर पर बम हमला किया गया, जिसमें सो रहे 5 वर्षीय बच्चे और उसकी 6 महीने की बहन की मौत हो गई, जबकि उनकी मां घायल हो गईं। इस दर्दनाक घटना के बाद 11 अप्रैल से लगातार विरोध प्रदर्शन जारी है।

प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव

इस घटना के बाद कुकी-जो बहुल चुराचांदपुर जिले के गेलमोल गांव में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव हुआ, जिसमें CRPF की फायरिंग में तीन प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई। स्थिति बिगड़ने के बाद राज्य सरकार ने 7 अप्रैल को कानून-व्यवस्था की अस्थिर स्थिति का हवाला देते हुए तीन दिनों के लिए इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी थीं।

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हालांकि 8 अप्रैल को ब्रॉडबैंड सेवाएं, विशेष रूप से इंटरनेट लीज्ड लाइन और फाइबर टू द होम (FTTH), सशर्त बहाल कर दी गईं, लेकिन मोबाइल इंटरनेट सेवाओं पर चरणबद्ध तरीके से रोक जारी रही। अंततः शनिवार को मोबाइल इंटरनेट प्रतिबंध भी हटा लिया गया।

हिसंक झड़प में कुल छह लोग घायल हुए 

इसी बीच शनिवार को इम्फाल के थांगमेइबंद क्षेत्र में मशाल जुलूस के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़प हो गई। इस संघर्ष में कुल छह लोग घायल हुए, जिनमें तीन CRPF जवान भी शामिल हैं।
 

सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को ख्वैराम्बंद इमा मार्केट की ओर मार्च करने से रोक दिया, जिसके बाद पश्चिम इम्फाल के थांगमेइबंद, सगोलबंद और उरीपोक इलाकों में टकराव फैल गया। हालात काबू करने के लिए सुरक्षाबलों ने लाठीचार्ज किया, आंसू गैस के गोले छोड़े, मॉक बम, रबर बुलेट और कुछ जगहों पर हवाई फायरिंग भी की। जवाब में प्रदर्शनकारियों ने पत्थरबाजी की और गुलेल से हमला किया। इन झड़पों के बाद कई नागरिक संगठनों, जिनमें मैरा पैबी (मेइती महिलाओं का समूह) भी शामिल है, ने रविवार रात 12 बजे से पांच दिन के पूर्ण बंद का ऐलान कर दिया।

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सेनापति जिला और कांगपोकपी जिला की सीमा पर दो आदिवासी समुदायों के प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हो गई, जिससे इलाके में तनाव फैल गया। अधिकारियों के अनुसार, बंद के दौरान सड़क जाम हटाने पहुंची पुलिस की कार्रवाई के बाद स्थिति बिगड़ गई। इसी दौरान चांगौबुंग के कुकी ग्रामीण भी मौके पर पहुंच गए, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच पथराव शुरू हो गया। अधिकारियों ने बताया कि हंगामे के दौरान कुछ राउंड गोलियां भी चलीं, हालांकि फायरिंग किसने की, यह स्पष्ट नहीं हो सका है। 

सेवानिवृत्त जवान की हत्या का मामला

दूसरी ओर, यूनाइटेड नागा काउंसिल ने भी सोमवार से अलग बंद बुलाया है। यह बंद 18 अप्रैल को लिटन गांव के पास हुए एक अन्य हमले के विरोध में है, जिसमें भारतीय सेना के एक सेवानिवृत्त जवान की कथित तौर पर संदिग्ध कुकी उग्रवादियों द्वारा घात लगाकर हत्या कर दी गई थी।

सामाजिक कार्यकर्ताओं की क्या है मांग?

मंगलवार को भी राज्य के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन जारी रहे। लोग हत्याओं के खिलाफ न्याय की मांग करते हुए सड़कों पर उतरे। प्रदर्शनकारी और सामाजिक कार्यकर्ता रोहन फिलेम ने एएनआई से कहा कि जब तक पीड़ितों को न्याय नहीं मिलता, आंदोलन जारी रहेगा।

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