तमिलनाडु की राजनीति आज बेहद अहम मोड़ पर पहुंच गई है। राज्य के मुख्यमंत्री विजय को विधानसभा में बहुमत साबित करने के लिए फ्लोर टेस्ट का सामना करना है। इस शक्ति परीक्षण पर न सिर्फ विजय सरकार का भविष्य टिका है, बल्कि AIADMK के भीतर जारी सियासी उठापटक भी सबकी नजरों में है।
विजय ने हाल ही में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है। विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी टीवीके ने 108 सीटें जीतकर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया। हालांकि सरकार बनाने के लिए बहुमत का आंकड़ा पार करना जरूरी था। ऐसे में कांग्रेस के पांच विधायकों और सीपीआई, सीपीआईएम, वीसीके व IUML के दो-दो विधायकों के समर्थन से विजय खेमे की संख्या 121 तक पहुंच गई। इसी समर्थन के आधार पर उन्होंने राज्यपाल के सामने सरकार बनाने का दावा पेश किया था।
लेकिन सरकार गठन के तुरंत बाद राज्य की राजनीति में नया मोड़ तब आया जब AIADMK के भीतर मतभेदों की खबरें सामने आने लगीं। पार्टी में दो गुट बनने की अटकलें तेज हो गईं। एक धड़ा पूर्व मंत्री सीवी शनमुगम के नेतृत्व में माना जा रहा है, जबकि दूसरा पूर्व मुख्यमंत्री और पार्टी महासचिव एडप्पाडी के पलानीस्वामी के साथ खड़ा बताया जा रहा है।
सीवी शणमुगम ने दावा किया कि पार्टी के ज्यादातर नेताओं और कार्यकर्ताओं ने डीएमके के समर्थन से सरकार बनाने के किसी भी प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। इस बयान ने AIADMK के भीतर चल रही खींचतान को और खुलकर सामने ला दिया।
फ्लोर टेस्ट से पहले AIADMK ने अपने विधायकों के लिए सख्त व्हिप जारी किया है। पार्टी के राज्यसभा सांसद आईएस इनबादुराई ने साफ कहा कि पार्टी लाइन के खिलाफ जाने वाले किसी भी विधायक पर दल-बदल विरोधी कानून यानी संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत कार्रवाई की जाएगी।
एक AIADMK विधायक ने भी दावा किया कि पार्टी के अधिकांश विधायक अब भी एडप्पादी पलानीस्वामी के साथ हैं। विधायक ने कहा कि सभी फैसले एडप्पादी के. पलानीस्वामी ही लेंगे। करीब 25 विधायक यहां आएंगे। बहुमत हमारे साथ है। सभी लोग पार्टी के साथ रहेंगे और किसी तरह की चिंता की जरूरत नहीं है।
उधर, टीटीवी धिनकरन ने भी अपनी पार्टी AMMK के विधायक एस कामराज को पार्टी से बाहर कर दिया है। कामराज पर आरोप है कि उन्होंने विधानसभा में टीवीके सरकार को समर्थन देने का फैसला किया। इसके बाद उन्हें पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और सभी जिम्मेदारियों से हटा दिया गया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फ्लोर टेस्ट सिर्फ विजय सरकार के बहुमत का परीक्षण नहीं है, बल्कि AIADMK के संगठनात्मक भविष्य की भी बड़ी परीक्षा है। एनडीए खेमे का हिस्सा AIADMK विधानसभा चुनाव में 47 सीटें जीतने में सफल रहा था, लेकिन अब पार्टी के भीतर संभावित टूट और विधायकों की नाराजगी की चर्चाओं ने उसकी स्थिति को कमजोर कर दिया है।