टीवीके के महासचिव आधव अर्जुन ने अभिनेता रजनीकांत के राजनीतिक प्रवेश पर अपनी पिछली टिप्पणी के लिए उनसे माफी मांगी है। उन्होंन कहा है कि उनका इरादा उन्हें नीचा दिखाने का नहीं था। शीर्ष अभिनेता की ओर से हुई आलोचना के बाद अर्जुन ने मंगलवार रात यहां तमिलगा वेट्री कजगम की एक बैठक को संबोधित करते हुए माफी मांगते हुए कहा कि उन्हें गलत समझा गया था।
मेरी बात को गलत समझा-अर्जुन
अर्जुन ने कोलाथुर में पार्टी की बैठक में कहा "मेरा मकसद रजनीकांत को नीचा दिखाना नहीं था, जो मेरे नेता (अभिनेता-राजनेता विजय) के भी नेता हैं। मैंने तो बस इतना कहा था कि यह डीएमके की साजिश है। मुझे समझ आता है कि उन्होंने मेरी बात को गलत समझा।" उन्होंने आगे कहा कि उनका यह कहना नहीं था कि रजनीकांत डरे हुए थे। "उनके बयान से मुझे लगता है कि उन्हें ठेस पहुंची होगी... मेरा इरादा कुछ और था। अगर मेरी बात को गलत समझा गया है, तो मैं खुले तौर पर खेद व्यक्त करता हूं और माफी मांगता हूं।"
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रजनीकांत ने क्या प्रतिक्रिया दी
अर्जुन ने आगे कहा कि रजनीकांत से काफी छोटा होने के कारण, उन्हें अपनी युवावस्था में चुनाव संबंधी काम करने का अवसर मिला, और एक सर्वेक्षण के दौरान उन्होंने पाया कि रजनीकांत ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की घोषणा के तुरंत बाद 18 प्रतिशत वोट हासिल किए थे। उन्होंने दावा किया कि यह कुछ असाधारण था और इसने रजनीकांत के दुश्मनों के बीच भय पैदा कर दिया। 17 मार्च को रजनीकांत ने अर्जुन के इस आरोप का जवाब देते हुए इसे असत्य बताया कि जब उन्होंने राजनीति में प्रवेश करने का प्रयास किया तो डीएमके ने उन्हें धमकी दी थी। रजनीकांत ने एक्स' पर पोस्ट किए गए अपने बयान में कहा, समय बोलता नहीं, बल्कि प्रतीक्षा करता है और जवाब देता है।" अपने संक्षिप्त बयान में रजनीकांत ने उन सभी राजनीतिक दलों के नेताओं, मंत्रियों, शुभचिंतकों और प्रशंसकों को भी धन्यवाद दिया जिन्होंने इस विवाद में उनका समर्थन किया था।
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क्या है मामला
अन्नाद्रमुक प्रमुख एडप्पादी पलानीस्वामी, केंद्रीय मंत्री एल मुरुगन, राज्य मंत्री एस रेगुपति, भाजपा के राज्य प्रमुख नैनार नागेंद्रन और रजनीकांत के पूर्व सलाहकार रा अर्जुनमूर्ति ने सुपरस्टार पर अर्जुन की टिप्पणी पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। 12 मार्च को राज्य सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान पार्टी सदस्यों को संबोधित करते हुए अर्जुन ने आरोप लगाया कि "रजनीकांत ने जब राजनीति में आने की कोशिश की तो डीएमके ने उन्हें धमकाया"। उन्होंने कहा कि वह अभिनेता की आलोचना नहीं कर रहे थे, बल्कि यह बताना चाहते थे कि टीवीके के संस्थापक विजय में इस तरह के दबाव का सामना करने का साहस था।