फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

उपलब्धि: देशभर में तेजी से कम हो रहे टीबी के मामले, जानिए आईसीएमआर की रिपोर्ट में क्या बताया?

Fri, 26 Dec 2025 04:30 AM IST
लव गौर परीक्षित निर्भय, अमर उजाला

सार

आईसीएमआर के अनुसार डिजिटल तकनीक और सक्रिय मरीजों की तेजी से खोज हो रही है, जिससे टीबी देश टीबी उन्मूलन की दहलीज पर खड़ा है। पहचान, इलाज और निगरानी के कई नए तरीकों ने इस प्रगति को मजबूती दी है।
विज्ञापन
देशभर में तेजी से कम हो रहे टीबी के मामले - फोटो : अमर उजाला प्रिंट
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

 भारत टीबी को खत्म करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है लेकिन कई कमजोर जिले अभी भी बड़ी चुनौती बने हुए हैं। आईसीएमआर राष्ट्रीय क्षयरोग अनुसंधान संस्थान (एनआईआरटी) की नई टीबी उन्मूलन तकनीकी रिपोर्ट 2025 के अनुसार देश में पिछले कुछ वर्षों में टीबी के मामलों में गिरावट आई है। विशेषज्ञों का कहना है कि टीबी को खत्म करने की दिशा में देश ने उल्लेखनीय प्रगति की है।
विज्ञापन


आईसीएमआर के अनुसार डिजिटल तकनीक और सक्रिय मरीजों की तेजी से खोज हो रही है, जिससे टीबी देश टीबी उन्मूलन की दहलीज पर खड़ा है। पहचान, इलाज और निगरानी के कई नए तरीकों ने इस प्रगति को मजबूती दी है। रिपोर्ट बताती है कि भारत टीबी उन्मूलन के प्री-एलीमिनेशन चरण की ओर बढ़ रहा है, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर मिली इस सफलता की राह में कुछ जिले ऐसे भी हैं जहां टीबी का संक्रमण अभी भी गहरी जड़ें जमाए हुए है।

रिपोर्ट स्वीकारती है कि टीबी घटने के बावजूद भारत दुनिया के करीब 27 प्रतिशत टीबी बोझ का अकेले सामना कर रहा है। हालांकि देश में नई जांच तकनीक जैसे सीबी-नेट, ट्रू-नैट और डिजिटल एक्स-रे के जरिए बीमारी की पहचान में बहुत मदद कर रही हैं। इसके अलावा निक्षय पोर्टल जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म ने मरीजों की निगरानी और दवाइयों की उपलब्धता को पहले से अधिक व्यवस्थित किया है लेकिन फिर भी पूर्वोत्तर के कठिन इलाकों, आदिवासी क्षेत्रों, शहरी झुग्गी-बस्तियों और सीमावर्ती जिलों में संक्रमण की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। इन इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की सीमित पहुंच, कुपोषण, लगातार जगह बदलने वाले समुदाय और बिना लक्षण वाले मरीजों की अधिक संख्या बीमारी की रोकथाम को मुश्किल बना देती है।
विज्ञापन


निजी अस्पतालों की कम भागीदारी बड़ा रोड़ा
आईसीएमआर ने खुलासा किया है कि निजी अस्पताल अभी भी टीबी रिपोर्टिंग और उपचार में पर्याप्त योगदान नहीं दे रहे। निजी अस्पतालों और क्लीनिकों की भागीदारी अभी भी पर्याप्त नहीं है, जिससे गंभीर मामलों की रिपोर्टिंग पूरी तरह नहीं हो पाती और इलाज की निगरानी में खामियां रह जाती हैं। कई अस्पताल सही तरह से मरीजों की जानकारी नहीं दे रहे हैं तो कई फॉलो-अप नहीं कर रहे हैं। दवा पालन और निगरानी कमजोर है और यह कमी कई जिलों में टीबी नियंत्रण के प्रयासों को धीमा कर रही है।

ये भी पढ़ें: उपलब्धि: कैंसर के इलाज की नई तकनीक विकसित, मजबूत होगी प्रतिरक्षण प्रणाली
विज्ञापन


टीबी ठीक होने के बाद भी खतरा
रिपोर्ट में माना, टीबी के बाद होने वाली फेफड़ों की बीमारी जिसे पोस्ट-टीबी लंग डिजीज के नाम से जानते हैं, से लंबे समय तक सांस की समस्या, फेफड़ों की कमजोरी या काम करने की क्षमता में कमी का सामना करते हैं। भारत में इस स्थिति की पहचान और प्रबंधन अभी भी कमजोर है जबकि यह लाखों मरीजों की जिंदगी को प्रभावित कर रही है। रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने 2025 तक टीबी उन्मूलन का लक्ष्य रखा है जो वैश्विक लक्ष्य (2030) से पांच साल पहले है। लेकिन कमजोर जिलों में स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत किए बिना, पोषण सुधार पर ध्यान दिए बिना और निजी क्षेत्र को सक्रिय भूमिका दिए बिना यह लक्ष्य पूरा करना मुश्किल होगा।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें