छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार में एक बार फिर उठापटक का दौर शुरू हो गया है। प्रदेश की भूपेश बघेल की सरकार में कद्दावर मंत्री टीएस सिंह देव ने पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के मंत्री के पद से इस्तीफे दे दिया है। हालांकि देव के इस इस्तीफे के बाद राज्य सियासत में शांति नजर आ रही है। एक तरफ जहां कांग्रेस और मुख्यमंत्री टीएस सिंह देव से चर्चा करने का आश्वासन दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ भाजपा फिल्हाल वेट एंड वॉच की स्थिति में है। हालांकि इस बीच प्रदेश के मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि मैंने उनसे (सिंहदेव) बात नहीं की है। मैंने उन्हें बीती रात फोन करने की कोशिश की थी, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया।
अमर उजाला को मिली जानकारी के अनुसार, स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव के इस्तीफे वाली चिट्ठी से कांग्रेस के कई विधायक नाराज हैं। रविवार को मुख्यमंत्री निवास में हुई विधायक दल की बैठक में 14 मंत्रियों-विधायकों ने सिंह देव के पत्र में लगाए गए आरोपों पर आपत्ति जताई। पत्र को अनुशासनहीनता बताया। सिंह देव के खिलाफ कार्रवाई की मांग वाले एक पत्र पर भी अधिकांश विधायकों के हस्ताक्षर लिए गए हैं। इसे लेकर प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया दिल्ली जाएंगे।
इस बैठक में नगरीय प्रशासन मंत्री डॉ. शिव डहरिया ने टीएस सिंह देव के इस्तीफे का मामला उठा दिया। डहरिया ने कहा, यह सरकार को अपमानित करने वाली स्थिति है। सरकार अच्छा काम कर रही है। इसके बावजूद ऐसा लिखा जा रहा है, यह बेहद आपत्तिजनक है। राजिम विधायक अमितेश शुक्ला ने कहा, उनके बाप-दादा के जमाने में भी कभी ऐसा नहीं हुआ। यह ठीक नहीं हो रहा है। भिलाई विधायक देवेंद्र यादव ने यहां तक कह दिया कि यह सरासर अनुशासनहीनता का मामला है। ऐसा पत्र लिखने वाले के खिलाफ अभी और यहीं कार्यवाही होनी चाहिए।
छत्तीसगढ़ में सीएम भूपेश बघेल और टीएस सिंहदेव के बीच तनातनी किसी ये छिपी हुई नहीं है। सरगुजा जिले के अंबिकापुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक टीएस सिंह देव छत्तीसगढ़ कांग्रेस के कद्दावर नेताओं में शुमार हैं। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार के गठन के समय सीएम पद के ढाई-ढाई वर्ष के बंटवारे की चर्चा के दौरान सिंह देव का नाम काफी चर्चा में रहा था। इसके बाद से ही सिंहदेव लगातार छत्तीसगढ़ कांग्रेस में चर्चा का केंद्र बिंदु रहे हैं।
2021 में विधानसभा के मानसून सत्र से ठीक पहले कांग्रेस सरकार में बवंडर उठा था। रामानुजगंज से विधायक बृहस्पत सिंह ने प्रेस वार्ता कर आरोप लगाया कि सिंह देव उन्हें मारना चाहते हैं। उनके साथ 18 विधायक और भी थे। अगले दिन सत्र शुरू हुआ और विधानसभा में बवाल हो गया। आहत सिंह देव ने सरकार की ओर से सफाई आने तक सदन में आने से इनकार कर दिया। बाद में बृहस्पत सिंह ने अपने बयानों के लिए सदन में माफी मांगी। गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू ने सरकार की ओर से बयान दिया कि सिंह देव पर लगाए गए आरोप निराधार हैं। उसके बाद सिंहदेव विधानसभा की कार्यवाही में शामिल होने वापस लौटे।
सिंहदेव के इस्तीफे के बाद छत्तीसगढ़ भाजपा ने कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की है। इसकी वजह यह बताई जा रही है कि वह अभी राष्ट्रपति चुनाव के मद्देनजर चुप्पी साधे बैठी हुई है और विधायकों को साधने में जुटी है। छत्तीसगढ़ विधानसभा की कुल 90 सीटों में से 73 सीट कांग्रेस के पास और 14 सीटें भाजपा के पास हैं। हालांकि छत्तीसगढ़ के सियासी घटनाक्रम पर पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह ने तंज कसते हुए कहा, टीएस सिंह देव जी के इस्तीफे से यह बात साफ हो गई है कि मुख्यमंत्री और मंत्रियों के बीच भारी मतभेद हैं। भूपेश सरकार में मंत्रियों के पास कोई अधिकार नहीं है, अभी तो एक ने इस्तीफा दिया है, सब मंत्रियों-विधायकों के मन में भी भारी आक्रोश है, देखना बड़ा विस्फोट होगा।