चागोस द्वीप समूह को मॉरीशस को सौंपने का ब्रिटेन का समझौता अमेरिका के बदले रुख के कारण अटक गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा इसे कमजोरी का कदम बताए जाने के बाद अमेरिका का समर्थन कमजोर पड़ गया। डिएगो गार्सिया सैन्य अड्डा इस विवाद की जड़ बना हुआ है।
हिंद महासागर में स्थित चागोस द्वीप समूह को लेकर ब्रिटेन और मॉरीशस के बीच हुआ अहम समझौता अब अटक गया है। इसकी सबसे बड़ी वजह अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप का बदला हुआ रुख माना जा रहा है। इस घटनाक्रम से डिएगो गार्सिया सैन्य अड्डा भी एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है।
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ब्रिटेन ने साफ कहा है कि अमेरिकी समर्थन के बिना इस समझौते को लागू करना संभव नहीं है। संसद में जानकारी देते हुए मंत्री स्टीफन डाउटी ने बताया कि हाल के दिनों में ट्रंप का रुख बदल गया है, जिससे 1966 के रक्षा समझौते में संशोधन करना मुश्किल हो गया है। यही वजह है कि चागोस द्वीप मॉरीशस को सौंपने की प्रक्रिया फिलहाल रोक दी गई है।
क्या है चागोस द्वीप और क्यों है इतना अहम?
चागोस द्वीप समूह करीब 60 द्वीपों का समूह है, जिसमें डिएगो गार्सिया सबसे महत्वपूर्ण है। यह इलाका पश्चिमी देशों के लिए सैन्य और रणनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जाता है। यहां ब्रिटेन और अमेरिका का संयुक्त सैन्य अड्डा है, जो क्षेत्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय रणनीति में बड़ी भूमिका निभाता है।
क्या था ब्रिटेन-मॉरीशस के बीच समझौता?
पिछले साल हुए समझौते के तहत ब्रिटेन को चागोस द्वीप की संप्रभुता मॉरीशस को सौंपनी थी। हालांकि डिएगो गार्सिया सैन्य अड्डे को 99 साल के लिए पट्टे पर रखने की योजना बनाई गई थी। इस समझौते की अनुमानित लागत करीब 3.4 अरब पाउंड थी।
ट्रंप के बयान से बदला पूरा समीकरण?
डोनाल्ड ट्रंप ने पहले इस समझौते का समर्थन किया था, लेकिन बाद में उन्होंने इसे ‘कमजोरी का कदम’ बताया। उनके इस बयान के बाद अमेरिका का समर्थन कमजोर पड़ गया और ब्रिटेन के लिए समझौते को आगे बढ़ाना मुश्किल हो गया। इससे पूरी डील पर ब्रेक लग गया है।
ब्रिटेन अब भी समझौते के पक्ष में
ब्रिटेन सरकार ने कहा है कि यह समझौता भविष्य में सैन्य अड्डे की सुरक्षा के लिए जरूरी है। सरकार का मानना है कि डिएगो गार्सिया बेस की सुरक्षा और संचालन के लिए यह सबसे अच्छा विकल्प है और वह अमेरिका व मॉरीशस के साथ बातचीत जारी रखेगी। इस मुद्दे पर अब नए सिरे से बातचीत की संभावना जताई जा रही है। ब्रिटेन और अमेरिका के बीच डिएगो गार्सिया को लेकर चर्चा फिर शुरू हो सकती है। माना जा रहा है कि नई रणनीति तय होने के बाद ही इस समझौते को आगे बढ़ाया जाएगा।