एक साल से भी कम समय में अदालत ने सुनाया फैसला
जिला एवं सत्र न्यायाधीश सांकरी दास की अदालत ने दलीलों को सुनने के बाद बुधवार को फांसी की सजा सुनाई। इस दौरान सरकार के वकील विकास देब ने कहा, शुरूआत में ऐसा लगा कि आरोपी प्रदीप देबरॉय मानसिक रूप से बीमार है, लेकिन बाद में डॉक्टर्स ने प्रमाणित किया वह मानसिक रूप से फिट है। अदालत ने एक साल से भी कम समय में अपना फैसला सुनाया है।
26 नवंबर की रात दोनों बेटियों की लोहे की रोड से की हत्या
जिले के उत्तर रामचंद्रघाट इलाके के रहने वाले और पेशे से दिहाड़ी मजदूर देबरॉय ने पिछले साल 26 नवंबर की आधी रात अपनी दो बेटियों अदिति और मंदिरा की लोहे की रॉड से हत्या कर दी थी।
घटनास्थल पर पहुंचे भाई को भी मार डाला, राहगीरों पर किया हमला
सहायक महानिरीक्षक ज्योतिष्मान दास चौधरी ने कहा, जब उसका बड़ा भाई अमलेश देबरॉय घटनास्थल पर आया, तो उसे भी दोषी ने मौके पर मार डाला। परिवार के तीन सदस्यों की हत्या करने के बाद अपराधी सड़क पर आया और उसने राहगीरों पर हमला करना शुरू कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप रिक्शे पर जा रहे दो लोगों को गंभीर चोटें आईं। बाद में उनमें से एक व्यक्ति कृष्णा दास ने खोवाई अस्पताल में दम तोड़ दिया।
पुलिस बल के साथ पहुंचे थाना प्रभारी को भी मार डाला
इसके बाद खोवाई थाना प्रभारी सत्यजीत मलिक पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और उसे हिरासत में लेने की कोशिश करने लगे, तो देबरॉय ने मलिक पर भी हमला कर दियाऔर बाद में अगरतला के एक सरकारी अस्पताल में उनकी मृत्यु हो गई। आखिरकार पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया।
पुलिस ने इस जघन्य हत्याकांड की तेजी से जांच करने के बाद आरोप पत्र अदालत में पेश किया। हालांकि, घटना की रात देबरॉय अचानक हिंसक क्यों हो गया, इसका पता नहीं चल सका।