राज्य सरकार ने एकल पीठ के इस फैसले पर पुनर्विचार के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इस मामले की सुनवाई से जुड़े अधिवक्ता हरेकृष्णा भौमिक ने इस फैसले को लिंग भेद पर विजय करार दिया है।
त्रिपुरा हाईकोर्ट की खंडपीठ ने एकल पीठ के उस आदेश को बरक रार रखा है, जिसके मुताबिक नौकरी में रहते यदि पिता की मृत्यु हो जाती है और शादीशुदा बेटी पिता की आय पर निर्भर है तो वह अनुकंपा नौकरी की हकदार होगी।
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मुख्य न्यायाधीश इंद्रजीत मोहंती और जस्टिस एससी चट्टोपाध्याय की खंडपीठ ने मंगलवार को अनुकंपा नौकरी के मामले में एकल पीठ के निर्णय पर राज्य सरकार की पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया। खंडपीठ ने एकल पीठ के उस निर्णय को बरकरार रखा है, जिसमें कहा गया था, यदि नौकरी करने के दौरान पिता की मृत्यु हो जाती है और शादीशुदा पुत्री, पिता की आय पर निर्भर है तो वह अनुकंपा नौकरी की हकदार होगी।
राज्य सरकार ने एकल पीठ के इस फैसले पर पुनर्विचार के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इस मामले की सुनवाई से जुड़े अधिवक्ता हरेकृष्णा भौमिक ने इस फैसले को लिंग भेद पर विजय करार दिया है।