पूर्वोत्तर में निवेश बढ़ाने के उद्देश्य से बनाई गई उच्चस्तरीय टास्क फोर्स सितंबर तक अपनी रिपोर्ट उत्तर-पूर्व परिषद (एनईसी) को सौंपेगी। इस बात की जानकारी त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने शनिवार को दी। उन्होंने कहा कि यह रिपोर्ट क्षेत्र में निवेश बढ़ाने की रणनीति तैयार करेगी।
बता दें कि यह टास्क फोर्स मार्च 2024 में पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (डीएएनईआर) द्वारा बनाई गई थी। इसका उद्देश्य निवेश को बढ़ावा देने और पूर्वोत्तर के विकास के लिए उपयुक्त रणनीति तैयार करना है। इस टास्क फोर्स के संयोजक खुद माणिक साहा हैं।
एक नई रोडमैप पर काम कर रही फोर्स
गुवाहाटी में आयोजित 'नॉर्थ ईस्टर्न रीजन स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन मीटिंग' में बोलते हुए साहा ने कहा कि टास्क फोर्स एक रणनीतिक रोडमैप पर काम कर रही है, जिससे पूर्वोत्तर भारत को निवेश के लिए एक पसंदीदा स्थान बनाया जा सके। उन्होंने बताया कि डोनर मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।
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अमेरिकी डॉलर के निवेश प्रस्ताव मिले
इससे पहले दिल्ली में 23-24 मई को आयोजित 'राइजिंग नॉर्थईस्ट इन्वेस्टमेंट समिट' में 4.3 मिलियन अमेरिकी डॉलर के निवेश प्रस्ताव मिले। इस समिट में यूरोप समेत 80 देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए और इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया। इसको लेकर साहा ने कहा कि निवेश सम्मेलन में एक आम भावना थी कि भारत का भविष्य पूर्वोत्तर में है। यह क्षेत्र अब वैश्विक भागीदारी और साझेदारी का केंद्र बन चुका है।
इन क्षेत्रों में खास संभावनाएं
सीएम साहा ने यह भी बताया कि पूर्वोत्तर राज्यों के पास अपने-अपने क्षेत्र में खास संभावनाएं हैं। जैसे कि अरुणाचल प्रदेश में जलविद्युत, असम में तेल और इलेक्ट्रॉनिक्स, मणिपुर में खेल और फिल्म, मेघालय में हॉस्पिटैलिटी, शिक्षा और आईटी, मिजोरम में बांस और हस्तशिल्प, नगालैंड में पर्यटन और कृषि और त्रिपुरा में पर्यटन, अगर, रबर, शिक्षा और स्वास्थ्य।
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एशियन डेवलपमेंट बैंक की रिपोर्ट
इसके साथ ही साहा ने बताया कि एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) ने 'नॉर्थईस्ट इकोनॉमिक कॉरिडोर' पर एक स्टडी की है, जिसमें क्षेत्र के भीतर और बाकी भारत व दक्षिण एशियाई देशों से जुड़ने के लिए मल्टी-मोडल ट्रांसपोर्ट नेटवर्क बनाने का सुझाव दिया गया है। इस रिपोर्ट में 24 विकास केंद्र और 20 बॉर्डर हब्स को प्राथमिकता के आधार पर विकसित करने की सिफारिश की गई है, ताकि विकसित भारत के लक्ष्य को पूरा किया जा सके।