त्रिपुरा के पुलिस महानिदेशक अनुराग धनखड़ की मौत का मामला सोमवार को विधानसभा में फिर राजनीतिक टकराव की वजह बन गया। सत्र के अंतिम दिन प्रश्नकाल शुरू होने से पहले कांग्रेस विधायक सुदीप रॉय बर्मन ने कथित
सुसाइड नोट को लेकर सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने आरोप लगाया कि डीजीपी की मौत से पहले लिखा गया यह नोट अब उपलब्ध नहीं है और उसे जानबूझकर गायब या फिर छिपाया गया है।
रॉय बर्मन ने सदन में कहा कि दिवंगत डीजीपी की पत्नी रविवार को त्रिपुरा पहुंची थीं। उन्होंने कथित तौर पर अपने पति के लिखे सुसाइड नोट के बारे में जानकारी मांगी। विधायक के मुताबिक, डीजीपी की पत्नी ने यह भी बताया कि नोट की तस्वीर उनके पास मौजूद है। इसके बावजूद मूल नोट नहीं मिल रहा है। कांग्रेस विधायक ने सवाल उठाया कि यदि नोट वास्तव में मौजूद था तो वह अब कहां है और उसे किसने हटाया। उनके आरोपों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सदन में माहौल गरमा गया।
इस तरीके से नहीं उठा सकते मुद्दाः अध्यक्ष
विधानसभा अध्यक्ष रामपदा जमातिया ने रॉय बर्मन को आगे बोलने से रोकते हुए कहा कि सदन के नियम इस तरह मामले पर चर्चा की अनुमति नहीं देते। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री प्रो. डॉ. माणिक साहा इस विषय पर पहले ही दो बार सदन
में बयान दे चुके हैं। अध्यक्ष ने कांग्रेस विधायक से अपनी बात समाप्त कर सीट पर लौटने को कहा। इससे नाराज कांग्रेस और माकपा विधायक सदन के बीचों-बीच पहुंच गए। हाथों में तख्तियां लेकर उन्होंने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और कथित सुसाइड नोट के गायब होने के आरोप की जांच की मांग की।
संसदीय कार्य मंत्री रतन लाल नाथ ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि पहले प्रश्नकाल पूरा होने दिया जाए। उन्होंने अध्यक्ष से विपक्ष को इसके बाद अलग तरीके से मामला उठाने का अवसर देने का आग्रह किया। इसके बाद विरोध कर रहे
विधायक अपनी सीटों पर लौट आए और सदन की कार्यवाही आगे बढ़ी।
मौत के बाद से उठ रहे सवाल
डीजीपी अनुराग धनखड़ की मौत पहले से ही त्रिपुरा की राजनीति में चर्चा का विषय बनी हुई है। विधानसभा में अब कथित सुसाइड नोट के गायब होने का आरोप सामने आने से मामले को लेकर नए सवाल खड़े हुए हैं। हालांकि, कांग्रेस विधायक के इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। सरकार या पुलिस की ओर से भी नोट को हटाए जाने या छिपाए जाने के आरोप पर तत्काल कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।