तीन तलाक के खिलाफ लड़ने वाली महिलाओं में से एक इशरत जहां का जीवन कोर्ट के फैसला के बाद और कठिन होता जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ऐसा लगा था कि उन्हों नई रोशनी की उम्मीद थी, लेकिन अभी के हालात उसके ठीक उल्टे हैं जैसा इशरत ने सोचा था। उनका कहना है कि अब वह पहले से कहीं ज्यादा अकेला महसूस करती है।
उन्होंने बताया कि फैसला आने के बाद से हालात और भी बदतर हो गए हैं, लोगों ने उनका बहिष्कार कर दिया है। वह एक 12X7 के कमरे में रहने के लिए मजबूर हैं। बता दें कि इशरत सिलाई करके अपना घर चलाती थी, लेकिन जब से कोर्ट का फैसला आया है कोई भी उनसे काम नहीं करवाना चाहता है।
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इशरत एक छोटे से कमरे और एक किचन में अपने दो बच्चों के साथ रहती हैं। उनके बराबर में ही उनके पति के भाई का परिवार भी रहता है। जो चाहता है कि इशरत वहां से चली जाएं। उन्होंने बताया कि वो लोग हमेशा कहते हैं कि तुम तलाकशुदा हो तो वहां क्यों रह रही हो जहां तुम्हारा पति रहता था, जहां से चली जाओ।
गौरतलब है कि कोर्ट के तीन तलाक को असंवैधानिक करार देने वाले फैसले के बाद से इशरत को समाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ रहा है। पश्चिम बंगाल के हावड़ा की रहने वाली इशरत को उसके पति ने दुबई से फोन पर तलाक दे दिया था। इतना ही नहीं उसके पति ने चारों बच्चों को उससे छीन लिया।
इसके बाद पति ने दूसरी शादी कर ली और उसे यूं ही बेसहारा छोड़ दिया। इशरत ने याचिका दायर कर तीन तलाक को असंवैधानिक और मुस्लिम महिलाओं के गौरवपूर्ण जीवन जीने के अधिकार का उल्लंघन बताया था।