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तीन तलाक : तीन साल कैद की सजा वाले अध्यादेश को दोबारा मिली मंजूरी

Fri, 11 Jan 2019 03:00 AM IST
Gaurav Pandey न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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मुस्लिम समुदाय में तीन तलाक को दंडात्मक अपराध घोषित करने और इसके तहत तीन साल कैद की सजा के प्रावधान वाला अध्यादेश 22 जनवरी को प्रभावहीन हो जाएगा। कैबिनेट ने इससे पहले ही गुरुवार को इसे दोबारा लागू किए जाने को मंजूरी दे दी।

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तीन तलाक बिल पूर्व में लोकसभा में पारित हो गया था। सत्तारूढ़ एनडीए के पास राज्यसभा में बहुमत नहीं होने के कारण बिल अटक गया था। इस पर पिछले साल सितंबर में अध्यादेश लागू किया गया। शीतकालीन सत्र के दौरान सरकार ने दोबारा तीन तलाक बिल पेश किया जिसमें सजा का प्रावधान शामिल है। यह बिल गत 17 दिसंबर को लोकसभा में पारित हो गया। विपक्ष के संशोधन की मांग पर अड़े रहने से यह बिल राज्यसभा में फिर अटक गया।

कोई भी अध्यादेश छह माह तक लागू रह सकता है, लेकिन संसद सत्र शुरू होने के 42 दिन के भीतर उसे विधेयक के द्वारा खत्म करना अनिवार्य होता है। अन्यथा अध्यादेश प्रभावहीन हो जाता है। पहला अध्यादेश 31 जनवरी को बजट सत्र शुरू होने से एक हफ्ते पहले प्रभावहीन हो रहा है। सरकार बजट सत्र के दौरान पुन: विधेयक भी पेश कर सकती है। 
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विधेयक राज्यसभा में पारित नहीं होता है तो पुन: अध्यादेश लागू करने के लिए फरवरी के मध्य में सत्र समाप्त होने तक इंतजार करना पड़ता लेकिन कैबिनेट ने वृहस्पतिवार को ही इसे दोबारा लागू किए जाने का निर्णय कर लिया। गौरतलब है कि विपक्ष दोबारा पेश किए गए विधेयक में से खास तौर से दंडात्मक अपराध घोषित करने का प्रावधान हटाए जाने की मांग कर रहा है। 

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