संसदीय मामलों की कैबिनेट समिति ने शुक्रवार को संसद का शीतकालीन सत्र 15 दिसंबर से पांच जनवरी तक आयोजित करने की सिफारिश की। इस सत्र में तीन तलाक और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (एनसीबीसी) जैसे महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए जाने की उम्मीद है।
साथ ही इस सत्र में तीन अन्य विधेयक पेश किए जाएंगे जो जीएसटी (राज्यों को मुआवजा)-2017, दिवाला और दिवालियापन संहिता (संशोधन) और भारतीय वन (संशोधन) के अध्यादेशों का स्थान लेंगे।
गृह मंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में संसदीय मामलों पर संसदीय समिति (सीसीपीए) ने शुक्रवार को बैठक कर संसद के शीतकालीन सत्र की तिथि पर फैसला लिया। संसदीय कार्यमंत्री अनंत कुमार ने कहा, ‘हम विपक्ष सहित सभी दलों से दोनों सदनों में सामान्य कामकाज चलाने तथा सत्र को फलदायी बनाने में सहयोग चाहते हैं।’
गौरतलब है कि 22 नवंबर को इस संबंध में हुई बैठक के बाद कैबिनेट के निर्णय के बारे में संवाददाताओं से बातचीत के दौरान वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि संसद के शीतकालीन सत्र का कार्यक्रम ऐसा होगा कि इसका विधानसभा चुनाव से टकराव नहीं हो और यह नियमित सत्र होगा।
उन्होंने कहा था, लोकतंत्र में जब चुनाव होते हैं, तब राजनीतिक दलों को सीधे लोगों को संबोधित करना होता है, सामान्य तौर पर चुनाव और संसद सत्र की तिथियों में टकराव नहीं होता। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि संसद का शीतकालीन सत्र नियमित हो, लेकिन चुनाव और सत्र की तिथि में टकराव नहीं हो।
इससे एक दिन पहले अनंत कुमार ने कहा था कि सरकार संसद का शीतकालीन सत्र दिसंबर में बुलाएगी और इसकी तिथि जल्द घोषित की जाएगी। उन्होंने इस संदर्भ में संप्रग सरकार के दौरान बुलाए सत्र का जिक्र किया और सत्र बुलाने में देरी के कांग्रेस के आरोपों को खारिज कर दिया।
उन्होंने कहा कि विपक्षी दल ‘चुनिंदा विस्मृति’ से पीड़ित है क्योंकि 2008 और 2013 में कांग्रेस नीत संप्रग सरकार ने भी शीतकालीन सत्र दिसंबर में बुलाया था।