तीन तलाक को गैर-इस्लामिक और कुरान के विपरीत बताते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया
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दो मुस्लिम महिलाओं ने ट्रिपल तलाक को गैर-इस्लामिक और कुरान के विपरीत बताते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। दोनों महिलाओं ने इस्लामिक कानून की व्याख्या करने का निर्देश देने की गुहार लगाई है। इसके अलावा दो गैर-सरकारी संगठनों ‘बेबाक कलेक्टिव’ और ‘सेंटर फॉर स्टडी ऑफ सोसायटी एंड सेक्यूलरिज्म’ ने भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर इस मामले में उन्हें भी पक्षकार बनाने की गुहार की है।
जाकिया सोन और नूरजहां साफिया नियाज ने अपनी याचिकाओं में कहा है कि ट्रिपल तलाक (तलाक-उल-बिदात) और निकाह हलाला, दो ऐसे उदाहरण हैं जो दर्शाते हैं कि कुरान की निषेधाज्ञा का किस तरह से आज उल्लंघन हो रहा है।
निकाह हलाला वह प्रथा है जिसमें महिला को अपने तलाकशुदा पति से दोबारा शादी करने से पहले दूसरे मर्द से शादी करनी होती है और फिर उसे तलाक देना होता है। दोनों महिलाओं का कहना है कि शीर्ष अदालत मेें समान नागरिक संहिता का मामला लंबित नहीं हैं लेकिन इसे लेकर भम्र फैलाया जा रहा है।
शायरा बानो की याचिका पर शीर्ष अदालत ने लिया सुनवाई का निर्णय
जाकिया सोन और नूरजहां साफिया नियाज भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन की सह संस्थापक
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याचिकाकर्ता जाकिया सोन और नूरजहां साफिया नियाज भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन की सह संस्थापक है। उन्होंने अपनी याचिका में यह दावा किया है कि ट्रिपल तलाक की प्रथा शरीयत के सिद्धांतों की अवहेलना है। कुरान की आयतों से यह समझा जा सकता है कि महिलाओं के लिए न्याय और समानता पैगंबर के हृदय के करीब है।
तलाक-उल-बिदात और निकाह हलाला से भारतीय मुस्लिम महिलाओं के साथ अन्याय हो रहा है। याचिका में तलाक-उल-बिदात और निकाह हलाला को गैर-कानूनी करार देने की गुहार की गई है। याचिका में कहा गया है कि मिस्र, तुर्की, जॉर्डन, पाकिस्तान और बांग्लादेश सहित कई मुस्लिम देशों में ट्रिपल तलाक वैध नहीं है।
शायरा बानो की याचिका पर शीर्ष अदालत ने लिया सुनवाई का निर्णय
शायरा बानो ने मुस्लिम पर्सनल लॉ के इन प्रावधानों (ट्रिपल तलाक और निकाह हलाला) को चुनौती दी है। उनके द्वारा दाखिल याचिका पर शीर्ष अदालत पहले ही सुनवाई करने का निर्णय ले चुकी है। शायरा ने मुस्लिम पर्सनल लॉ के इन प्रावधानों को गैर-कानूनी और असंवैधानिक बताया है। वहीं ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने इस मामले में दखल देने की इजाजत मांगी है। बोर्ड का कहना है कि यह संस्कृति से जुड़ा मामला है।