पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस को उनके ही नेताओं से लगातार झटके मिल रहे हैं। गुरुवार को पार्टी को एक ही दिन में तीन बड़े राजनीतिक झटके लगे। राज्यसभा सदस्य कोयल मल्लिक ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया, पूर्व मंत्री मनीष गुप्ता ने राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा कर दी, जबकि राजारहाट-न्यूटाउन के पूर्व विधायक तापस चट्टोपाध्याय ने भी पार्टी छोड़ने के संकेत देकर सियासी हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया। कहा जा रहा है कि तापस चट्टोपाध्याय अगर पार्टी को नाता तोड़ लेते हैं तो यह टीएमसी के लिए बड़ा झटका होगा।
कोयल ने बढ़ाई अटकलें
दिन का सबसे बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम राज्यसभा सदस्य और अभिनेत्री कोयल मल्लिक के इस्तीफे के रूप में सामने आया। उन्होंने गुरुवार को नई दिल्ली में राज्यसभा के सभापति एवं उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन को अपना इस्तीफा सौंप दिया। इसके बाद उन्होंने केंद्रीय मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता भूपेंद्र यादव से मुलाकात की। राजनीतिक हलकों में इस मुलाकात को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि हाल के दिनों में तृणमूल छोड़ने वाले कई नेताओं के राजनीतिक भविष्य को लेकर भाजपा से जुड़ाव की चर्चाएं होती रही हैं। हालांकि कोयल मल्लिक ने अभी तक अपने अगले राजनीतिक कदम को लेकर कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है। फरवरी 2026 में तृणमूल ने कोयल मल्लिक को राज्यसभा भेजा था। दिलचस्प बात यह है कि राज्यसभा सदस्य बनने के बाद वह सदन की किसी कार्यवाही में शामिल नहीं हो सकीं और मानसून सत्र शुरू होने से पहले ही उन्होंने इस्तीफा दे दिया।
मनीष ने राजनीति को कहा अलविदा
पार्टी के दूसरे बड़े झटके के रूप में पूर्व मंत्री और वरिष्ठ नेता मनीष गुप्ता ने तृणमूल कांग्रेस के साथ-साथ सक्रिय राजनीति से भी संन्यास लेने की घोषणा कर दी। पश्चिम बंगाल के पूर्व गृह सचिव रह चुके मनीष गुप्ता ने कहा कि पिछले पांच वर्षों से उन्हें पार्टी में कोई सक्रिय जिम्मेदारी नहीं दी गई थी। मनीष गुप्ता ने कहा कि अब वह सार्वजनिक जीवन से अलग होना चाहते हैं और किसी अन्य राजनीतिक दल या गुट में शामिल होने की उनकी कोई योजना नहीं है। उन्होंने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की प्रशासनिक क्षमता और कार्यशैली की भी सराहना करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में पश्चिम बंगाल के विकास को कोई नहीं रोक सकता।
तापस के बयान से बढ़ीं चर्चाएं
राजारहाट-न्यूटाउन के पूर्व विधायक तापस चट्टोपाध्याय के ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले खेमे में शामिल होने की अटकलें भी तेज हो गई हैं। राजनीतिक सूत्रों का दावा है कि उन्हें संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जा सकती है। हालांकि तापस चट्टोपाध्याय ने इस पर स्पष्ट तौर पर कुछ नहीं कहा, लेकिन उन्होंने इन अटकलों का खंडन भी नहीं किया। उन्होंने कहा, अभी सब कुछ नहीं बताऊंगा। समय आने पर सबको पता चल जाएगा।" 2026 के विधानसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार से मात्र 316 वोटों से हारने वाले तापस चट्टोपाध्याय को कभी अभिषेक बनर्जी के करीबी नेताओं में गिना जाता था। ऐसे में उनका संभावित कदम तृणमूल के लिए एक और बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। लगातार सामने आ रहे इन घटनाक्रमों ने साफ कर दिया है कि विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस अब भी राजनीतिक पुनर्गठन और अंदरूनी चुनौतियों से जूझ रही है।
तृणमूल को हाल के बड़े झटके
- 20 लोकसभा सांसदों ने काकली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में अलग राह पकड़ी।
- राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर राय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बराइक पार्टी छोड़ चुके हैं।
- राज्यसभा सदस्य कोयल मल्लिक ने इस्तीफा दे दिया।
- पूर्व मंत्री मनीष गुप्ता ने पार्टी और राजनीति दोनों छोड़ने का एलान किया।
- पूर्व विधायक तापस चट्टोपाध्याय के भी अलग खेमे में जाने की अटकलें तेज हैं।