टीएमसी नेता दिनेश त्रिवेदी ने राज्यसभा से इस्तीफा देने के बाद कहा, तृणमूल कांग्रेस अब ममता बनर्जी की पार्टी नहीं रही। उस पर कुछ कारपोरेट पेशेवरों ने इस पर कब्जा कर लिया है, जिन्हें राजनीति का कोई ज्ञान नहीं है।
पार्टी में कोई फोरम नहीं है, जहां अपनी बात रखी जा सके। संसद में मूकदर्शक की तरह बैठना बंगाल के साथ नाइंसाफी होती। पार्टी में मैं अकेला नहीं हूं। अगर आप अन्य लोगाें से पूछे तो वह भी यही महसूस करते हैं। मुझे राज्यसभा भेजने के लिए मैं पार्टी को धन्यवाद देता हूं।
इससे पहले, त्रिवेदी ने शुक्रवार को चर्चा के दौरान उपसभापति से अपनी बात कहने का समय मांगा। उन्होंने कहा, आज एक बार फिर वह घड़ी आई जब मैंने अंतरात्मा की आवाज सुनी। मैं बैठे-बैठे सोच रहा था कि हम सब राजनीति में क्यों हैं। देश के लिए हैं, देश सर्वोपरि है।
उन्होंने बताया कि ऐसी ही घड़ी उस समय भी आई थी, जब मैं रेलमंत्री था। निर्णय मुश्किल था कि देश बड़ा, मेरा दल बड़ा या मैं बड़ा हूं। आज दुनिया हिंदुस्तान की ओर देखती है। मेरे राज्य में हिंसा हो रही है, लोकतंत्र में अजीब लग रहा है, क्या करूं।
आगे कहा कि पार्टी का अपना अनुशासन होता है, घुटन महसूस कर रहा हूं। आत्मा की आवाज आती है कब तक ऐसे चुपचाप देखते रहें, लिहाजा त्यागपत्र देना चाहता हूं। उनकी इस घोषणा पर उपसभापति हरिवंश ने कहा कि सदन से इस्तीफा देने की एक प्रक्त्रिस्या है। आप लिखित में इस्तीफा सभापति को सौंपे।
भाजपा में आना चाहें तो स्वागत: विजयवर्गीय
भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने कहा, अगर दिनेश त्रिवेदी भाजपा में आना चाहते हैं तो उनका स्वागत है। न सिर्फ त्रिवेदी, बल्कि जो भी ईमानदारी से काम करना चाहता है और टीएमसी में नहीं रह सकता, उसका भाजपा में स्वागत है।
त्रिवेदी ने जनता से विश्वासघात किया: सुखेंदु
राज्यसभा में टीएमसी के उपनेता सुखेंदु शेखर रे ने कहा कि त्रिवेदी ने जनता से विश्वासघात किया है। बीते कई सालों से उन्होंने कुछ नहीं कहा, लेकिन विधानसभा चुनाव से पहले अचानक इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपना असली रंग दिखाया है।
वहीं, लोकसभा में टीएमसी सांसद सौगत राय ने कहा, त्रिवेदी का इस्तीफा पार्टी के लिए चौंकाने वाला नहीं है और इसका आगामी विधानसभा चुनाव में कोई असर नहीं होगा। त्रिवेदी जमीन से जुड़े कार्यकर्ता नहीं है और वह लोकसभा चुनाव हार चुके हैं। इसके बावजूद ममता बनर्जी ने उन्हें राज्यसभा भेजा। अब उनके इस्तीफे से हमें किसी जमीनी कार्यकर्ता को राज्यसभा भेजने का मौका मिलेगा।
गुजरात से राज्यसभा जाने की अटकलें
इस बीच, चर्चा है कि त्रिवेदी जल्द ही भाजपा में शामिल होंगे और उन्हें गुजरात से राज्यसभा भेजा जा सकता है। दरअसल, त्रिवेदी गुजरात से ही आते हैं और गुजरात से उच्च सदन में दो सीटें खाली हैं, जिन पर अगले महीने चुनाव होना है।
तीन बार चुने गए राज्यसभा सांसद
दिनेश त्रिवेदी पहली बार अप्रैल 1990 में राज्यसभा सांसद चुने गए। इसके बाद वह मई, 2002 और जुलाई, 2020 में उच्च सदन पहुंचे। 2009 और 2014 में उन्होंने बंगाल के बैरकपुर से लोकसभा चुनाव लड़ा जीत दर्ज की।
2009 वह केंद्र सरकार में स्वास्थ्य मंत्री बने। 2011 में ममता बनर्जी ने बंगाल का मुख्यमंत्री बनने के लिए इस्तीफा दिया, जिसके बाद त्रिवेदी को रेल मंत्री बनाया गया। हालांकि अपना पहला रेल बजट पेश करने के बाद मार्च, 2012 में उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था।