ना चाहते हुए भी हमें ऐसी तस्वीरें आपको दिखानी पड़ रही है जो पहली नजर में आपका मिजाज खराब कर सकती है अगर आप थोड़े संवेदनशील हैं तो ये आपको आह भरने पर भी मजबूर कर सकती हैं।
ये वो तस्वीर हैं जो सवाल खड़ा करती हैं दरकती इंसानियत पर, लोगों की मरती संवेदनाओं पर और उससे भी बढ़कर दम तोड़ चुके उस सिस्टम पर जिसमें एक गरीब को अपनी मृतक पत्नी की देह ले जाने के लिए एक अदद वाहन भी न मिल पाए। जिस देश में छुटभैये नेताओं के काफिले के लिए भी प्रशासन मिनटों में सरकारी वाहनों की कतार लगा देता है वहां एक गरीब की कोई सुनवाई नहीं होती।
नतीजतन, एक बेबस पति अपनी बीवी के शव को कंधे पर रखकर दस किलोमीटर तक पैदल ही ढोने के लिए मजबूर होता है और लोग मरती संवेदनाओं के बीच बुत बनकर उसे देखते रहते हैं।
अस्पताल के कर्मचारियों ने नहीं की सरकारी एंबुलेंस की व्यवस्था
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- फोटो : ANI
मामला है ओडिशा के कालाहांडी का। जहां एक आदिवासी व्यक्ति को सरकारी अस्पताल में पत्नी की मृत्यु के बाद शव को ले जाने के लिए कोई वाहन नहीं मिला। दाना माझी की 42 वर्षीय पत्नी अमांग दी की टीबी के कारण मंगलवार की रात को भवानीपटाना के जिला मुख्यालय अस्पताल में मौत हो गई थी।
यह हाल तब था जब राज्य के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने कुछ दिन पहले ही गरीबों के लिए सरकारी अस्पताल से शवों को घरों तक पहुंचाने के लिए मुफ्त की सरकारी सेवा 'महापरायण' की शुरुआत की थी। लेकिन एक गरीब को लाख गिडगिड़ाने के बाद भी यह सुविधा मयस्सर नहीं हो सकी।
गरीब काफी देर तक अधिकारियों की खुशामद करता रहा लेकिन उन्हें नहीं पिघलना था तो नहीं पिघले। मजबूर पति ने खुद ही पत्नी के शव को कंधे पर रखा और चल दिया साथ में उसकी दस साल की बेटी भी थी जो मां का सामान अपने हाथों में संभाले चल रही थी।
हाल ही में नवीन पटनायक ने शुरू की थी एंबुलेंस व्यवस्था
सफर लंबा था उसे अपने 60 किलोमीटर दूर अपने गांव जाना था। दस किलोमीटर तक बाप बेटी एक शव को यूं ही कांधे पर ढोते रहे। लेकिन न किसी अधिकारी की आत्मा पिघली न किसी राह चलते राहगीर की। इस वाकये पर निगाह पड़ी तो कुछ पत्रकारों की जिन्होंने यह नजारा देख शहर के कलेक्टर को फोन कर इसकी जानकारी दी।
मामला मीडिया में आया तो कलेक्टर ने तुरंत फोन कर एंबुलेंस की व्यवस्था करवाई। माझी ने स्थानीय मीडिया को बताया, 'मैंने अस्पताल के अधिकारियों को बताया कि मैं गरीब आदमी हूं वाहन का खर्च नहीं उठा सकता। कई बार कहने के बाद भी उन्होंने ने मेरी कोई मदद नहीं की।'
वहीं कालाहांडी के कलेक्टर ब्रुंडा डी ने कहा, 'जब हमें इस घटना के बारे में पता चला तो हमने सीडीएमओ से एम्बुलेंस की व्यवस्था करने को कहा।'
WATCH:No Vehicle, Man in Odisha's Bhawanipatna walks 10 km carrying wife's body,with daughter beside himhttps://t.co/DJSYRLF7O2
— ANI (@ANI_news) August 25, 2016