विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) मेडिकल कंडिशन की अपनी वैश्विक सूची से मानसिक विकार के रूप में ट्रांसजेंडर आइडेंटिटी को हटाने की ओर बढ़ रहा है। हाल के एक शोध ने दशकों पुरानी स्थिति को खत्म करने का प्रस्ताव का अतिरिक्त समर्थन किया है।
इस बदलाव को अभी कुछ समितियों से सहमति हासिल करनी हैं जो इस पर विचार कर रही हैं। इसकी डब्ल्यूएचओ कोडबुक के अगले संस्करण, जो जो दुनिया भर में रोगियों के इलाज और बीमारियों को चिह्नित करती है, में समीक्षा की जाएगी।
हालांकि बदलाव के इस प्रस्ताव के अन्य हिस्सों पर सरगर्मी से चर्चा हो रही है। यह प्रस्ताव पूरी तरह से ट्रांसजेंडर को कोडबुक से बाहर नहीं करेगा बल्कि इसे एक नई श्रेणी ‘यौन स्वास्थ्य से संबंधित स्थिति’ की श्रेणी में शामिल किया जाएगा।
कोडबुक इंटरनेशनल क्लासिफिकेशन ऑफ डिजीज (आईसीडी) के अगले संस्करण से जुड़े मनोचिकित्सक प्रो. जेफ्री रीड ने कहा कि ट्रांसजेडर को मानसिक विकारों की श्रेणी से हटाने के प्रस्ताव पर विश्व स्वास्थ्य संगठन की तरफ से कोई विरोध नहीं हुआ है।
इसका इरादा इलाज की सीमाओं को कम करना है। आईसीडी का 25 सालों में पहला संशोधित संस्करण होगा और यह मई 2018 तक मंजूर हो जाएगा। कोलंबिया यूनिवर्सिटी में मनोरोग के प्रोफेसर और आईसीडी के तकनीकी सलाहकार डॉ. माइकल फर्स्ट का कहना है कि इससे शेष दुनिया को एक कड़ा संदेश जाएगा और वे इसे मानसिक विकार नहीं मानेंगे।