लॉकडाउन के समय से फंसे मजदूर अनलॉकडाउन-1 में सिर्फ श्रमिक ट्रेनों के भरोसे नहीं हैं। रेलवे द्वारा चलाई जा रही स्पेशल ट्रेन से भी लगातार बड़े शहरों से अपने गृह प्रदेश पहुंच रहे हैं। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मुंबई, दिल्ली, अहमदाबाद, सूरत समेत अन्य औद्योगिक व व्यापारिक स्टेशनों से उतर प्रदेश, बिहार, झारखंड जाने वाली ट्रेनें खचाखच भरी रह रही हैंजबकि वापसी दिशा की ट्रेन खाली ही चल रही हैं।
वापसी दिशा की गोरखधाम एक्सप्रेस की बात करें तो सेकेंड क्लास सीटिंग कोच में पूरे सप्ताह 500-650 से अधिक सीट खाली हैं। इसी तरह कुशीनगर से मुंबई जाने वाली स्पेशल ट्रेन में 300 से अधिक सीट खाली हैं। गोरखपुर-सूरत, हावड़ा सूरत एक्सप्रेस में भी 200-250 से अधिक सीट खाली हैं। इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि मजदूरों का पलायन अभी भी जारी है। जबकि उद्योग व व्यापार को पटरी पर लाने के लिए राज्य सरकारें कई पहल कर रही हैं।
औद्योगिक शहरों से चलने वाली ट्रेनों पर अगर नजर डालें तो मुंबई से गोरखपुर, गाजीपुर, हावड़ा, दरभंगा, पटना की तरफ चलने वाली ट्रेन में सभी सीट फुल हैं। इन ट्रेनों में अक्यूपेंसी 130 प्रतिशत तक है। यानी 100 सीट के लिए 130 लोग यात्रा टिकट ले रहे हैं जबकि यही ट्रेन वापसी दिशा में मुंबई के लिए रवाना हो रही हैं तो 50 से अधिक प्रतिशत सीटें खाली हैं। यहां तक कि सेकेंड क्लास स्लीपर जिसमें सिर्फ बैठने के लिए यात्रा टिकट सस्ते दरों पर जारी किया जा रहा है उस कोच में भी मांग नहीं है।
इसी तरह दिल्ली से उतर प्रदेश व बिहार के लिए चलने वाली सप्तक्रांति, वैशाली, बिहार संपर्क क्रांति ट्रेन में वेटिंग टिकट जारी किया जा रहा है। जून महीने में मुश्किल से ही इस रूट पर चलने वाली ट्रेनों में सीट खाली हैं जबकि यही ट्रेन वापसी दिशा में दिल्ली आ रही है तो उसमें 50-60 प्रतिशत सीट खाली हैं।
इसी तरह पश्चिम बंगाल की तरफ जाने वाली पूर्वा, दुरंतो, राजधानी में 110 प्रतिशत अक्यूपेंसी दर है जबकि वापस आने वाली ट्रेन खाली आ रही है। दिल्ली से आसाम के लिए चलने वाली ब्रहमपत्र मेल समेत सभी ट्रेन फुल है। इस ट्रेन में 140 प्रतिशत अक्यूपेंसी है।
अहमदाबाद से हावड़ा वाया दरंभाग चलने वाली ट्रेन की भी यही स्थिति है। जबकि वाराणसी से मुंबई, वाराणसी-सूरत के लिए चलने वाली स्पेशल ट्रेन में कन्फर्म टिकट आसानी से उपलब्ध है। सूरत से पटना के लिए चलने वाली ट्रेन में 13 जुलाई तक सीट खाली नहीं है। संपर्क क्रांति, बंगलूरू-हावड़ा दुरंतो में सीट उपलब्ध नहीं है।
इससे स्पष्ट है कि औद्योगिक केंद्रों और बड़े शहरों की तरफ जाने वाली ट्रेन से मजदूर वापस नहीं जा रहे है्। दरअसल लोग एडवांस टिकट की बुकिंग भी इन दिनों वापसी के लिए नहीं कर रहे हैं। यही स्थिति रही तो अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना कोरोना महामारी में लाना आसान नहीं होगा।