केंद्र सरकार की टीम में कई एजेंसियों को शामिल किया गया है; जर्मन डेवेलपमेंट एजेंसी और 'इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रांसपोर्ट डेवेलपमेंट एंड पॉलिसी' भी इस दिशा में काम कर रहे हैं। केंद्र सरकार में ट्रांसपोर्ट विभाग से जुड़े एक अधिकारी बतातें हैं कि बस, ट्रेन, मेट्रो, टैक्सी और यहां तक कि आटो व ई-रिक्शा के लिए भी नई पॉलिसी बन रही है।
बसों में कोरोना के लक्षणों की रेंडम जांच होगी। लॉकडाउन खुलने के बाद रेलवे द्वारा पहले चरण में केवल लंबी दूरी वाली गाड़ियां चलाई जाएंगी। एक बोगी में यात्रियों की संख्या आधी होगी। इससे किराया भी दोगुना बढ़ सकता है। मई के अंत में या जून के पहले सप्ताह में मेल गाड़ियां चलेंगी। सभी गाड़ियों में से एसी कोच हटाए जा रहे हैं। एक कंपार्टमेंट की 8 सीटों में से तीन-चार पर ही यात्री रहेंगे।