शीर्ष अदालत ने पिछले साल दिसंबर में ट्रायल कोर्ट को मामले की सुनवाई में तेजी लाने व मार्च 2022 तक रिपोर्ट देने को कहा था। इससे पहले 27 सितंबर को शीर्ष अदालत ने अजमेर की विशेष टाडा कोर्ट को तीन महीने के अंदर आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का निर्देश दिया था। आरोपी हामिर बिना आरोपपत्र के पिछले 11 साल से जेल में है।
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान में अजमेर की टाडा कोर्ट को 1993 में राजधानी एक्सप्रेस समेत अन्य ट्रेनों में हुए सीरियल बम धमाकों के मामले की सुनवाई 30 नवंबर तक पूरी करने को कहा है। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ व जस्टिस सूर्यकांत की पीठ को वकील शोएब आलम ने बताया कि आरोपी हामिर उइउद्दीन के खिलाफ ट्रायल शुरू हो गया है और गवाहों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया चल रही है।
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कोर्ट ने पिछले साल आरोपी हामिर के खिलाफ ट्रायल शुरू करने का निर्देश दिया था। आलम ने कहा कि जेल नियमों के तहत जो भी सुविधाएं हैं, खासकर परिजनों से मुलाकात की, उसे मुहैया कराई जाएं। पीठ ने कहा कि हम ट्रायल जज को 30 नवंबर 2022 तक सुनवाई को तेजी से पूरा करने का निर्देश देते हैं। साथ ही जेल नियमों के तहत मिलने वाली सुविधाआें पर विचार हो।
शीर्ष अदालत ने पिछले साल दिसंबर में ट्रायल कोर्ट को मामले की सुनवाई में तेजी लाने व मार्च 2022 तक रिपोर्ट देने को कहा था। इससे पहले 27 सितंबर को शीर्ष अदालत ने अजमेर की विशेष टाडा कोर्ट को तीन महीने के अंदर आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का निर्देश दिया था। आरोपी हामिर बिना आरोपपत्र के पिछले 11 साल से जेल में है। उस पर 5-6 दिसंबर 1993 में राजधानी एक्सप्रेस समेत अन्य ट्रेनों में धमाकों में शामिल होने का आरोप है।
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ये ट्रेनें मुंबई से नई दिल्ली, नई दिल्ली से हावड़ा, हावड़ा से नई दिल्ली जाने वाली राजधानी ट्रेनें, सूरत-बड़ौदा फ्लाई क्वीन एक्सप्रेस और हैदराबाद-नई दिल्ली एपी एक्सप्रेस थीं। इनमें दो यात्रियों की जान गई थी और 22 जख्मी हुए थे।
टुंडा को भी पेश करने का आदेश
कोर्ट ने सीबीआई को गाजियाबाद जेल में बंद सहअभियुक्त सैयद अब्दुल करीम उफ टुंडा को विशेष अदालत के समक्ष पेश करने को कहा है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई से कहा था कि या तो आरोपियों अभियुक्त बनाए या आरोप मुक्त करे, लेकिन ट्रायल शुरू करने में देरी न करे। राजस्थान सरकार ने आरोपपत्र में देरी का मुख्य कारण टुंडा के गाजियाबाद जेल में बंद होना बताया था।