मेघालय में बाहर से लााई गई मछलियों की बिक्री पर सरकार ने एक दिन पहले रोक लगा दिया था। इसके एक दिन बाद स्वास्थ्य विभाग ने जिस नदी से मछलियां लाकर राज्य में बेची जाती थी, उसकी टेस्ट रिपोर्ट जारी की है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। शुक्रवार को एक स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि फ्रोजन मछलियों में फंगल और बैक्टीरिया पाए गाए हैं। बता दें, अधिकारियों को पहले से ही इसकी भनक थी, इसलिए उन्होंने बाहर की मछलियों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया था लेकिन अब मेडिकल रिपोर्ट के बाद उनका दावा सही साबित हो गया है।
80 प्रतिशत मछलियों में फॉर्मेलिन
स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि पिछले महीने मछलियों के सैंपल इकट्ठे किए गए थे। इनकी जांच की तो सामने आया कि 80 प्रतिशत मछलियों में फॉर्मेलिन पाया गया है। फॉर्मेलिन मुख्यतः जैविक नमूनों के संरक्षण में इस्तेमाल किया जाता है। साथ ही मछलियों में गंभीर फंगल और बैक्टीरिया पाए गए हैं। अधिकारी के अनुसार, पहले चरण में उन्होंने 42 सैंपल्स जांच के लिए जमा किए थे। इनमें से 30 मछलियों में फॉर्मेलिन पाया गया है।
कई बीमारियों को जन्म देता है फॉर्मेलिन
एफएसएसएआई अधिकारियों की मानें तो इन मछलियों के सेवन से मानसिक अक्षमता, सिर दर्द, जोड़ों के दर्द और कफ आदि की परेशानियां बढ़ जाती हैं। सिर्फ 30 मिलीलीटर फॉर्मेलिन का सेवन काफी खतरनाक है। रोजाना उपयोग से गंभीर और बड़ी गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
इतने टन मछलियों की खपत करता है राज्य
साल 2018 में ही पर्वी राज्यों ने फॉर्मेलिन के कारण मछलियों के शिपमेंट पर प्रतिबंध लगा दिया था। मेघालय फिलहाल आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल और असम से 21 हजार मीट्रिक टन से अधिक मछली खरीदता है। वहीं हर साल राज्य में 33,000 मीट्रिक टन से अधिक मछली की खपत है।