सूर्य. चंद्रमा और पृथ्वी एक सीधी लाइन में नहीं होते तो उपच्छाया चंद्र ग्रहण लगता है। पृथ्वी की छाया से चंद्रमा पूरी तरह से या आंशिक रूप से ढक जाता है और सूर्य की किरणें चंद्रमा की सतह तक नहीं पहुंच पाती हैं।
विशेष चश्मे की नहीं होगी जरूरत
सूर्य ग्रहण की तरह चंद्र ग्रहण को देखने के लिए किसी विशेष चश्मे की जरूरत नहीं होती। इसे नंगी आंखों से देखा जा सकता है। इसे खास सोलर फिल्टर वाले चश्मे से भी देखा जा सकता है।
इस चंद्र ग्रहण से मंदिरों की सेवा सहित धार्मिक कार्यों पर कोई खास प्रभाव नहीं पड़ेगा। ज्योतिषाचार्यों ने चंद्रग्रहण के दौरान गर्भवतियों को इसे देखने से बचने की सलाह दी है। ज्योतिषाचार्यों की नजर में ग्रहण के प्रभाव से राजनीति में उथल-पुथल और प्रकृति में हलचल देखने को मिलेगी।
मिथुन, कर्क, मीन और वृश्चिक राशि पर इसका विपरीत प्रभाव रहेगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार एक पक्ष (पखवाड़ा) में दो ग्रहण किसी भी दृष्टि से ठीक नहीं हैं। दिसंबर 2019 के अंतिम सप्ताह में सूर्यग्रहण और अब नए साल 2020 के नौंवे दिन यह चंद्रग्रहण आ गया है। इसमें सूतक का अधिक प्रभाव नहीं बताया जा रहा है।
मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित जिवाजी वेधशाला के अधीक्षक डॉ. राजेंद्र प्रकाश गुप्त ने बताया कि इस साल छह ग्रहण लगेंगे लेकिन इनमें से केवल तीन ही देश में दिख सकेंगे। इन छह ग्रहणों में से चार चंद्र और दो सूर्य ग्रहण होंगे। पहला चंद्र ग्रहण शुक्रवार और शनिवार (10-11 जनवरी) की मध्य रात्रि को पड़ेगा जोकि देश में कुछ जगहों पर ही दिखाई देगा।
यह चंद्र ग्रहण शुक्रवार रात 10.36 बजे शुरू होकर शनिवार तड़के 2.44 बजे तक रहेगा। इसके अलावा दूसरा चंद्र ग्रहण पांच और छह जून की मध्य रात्रि को पड़ेगा जो देश में दिखेगा जबकि पांच जुलाई और 30 नवंबर को पड़ने वाला चंद्र ग्रहण नहीं दिखाई देगा। 21 जून को सूर्य ग्रहण पड़ेगा जोकि देश में दिखेगा और 14 दिसंबर को पड़ने वाला पूर्ण सूर्य ग्रहण देश में नहीं दिखाई देगा।