राहुल गांधी के चार दिवसीय यूरोप दौरे का आज आखिरी दिन है। इस दौरान माना जा रहा है कि वो इंग्लैंड के बर्मिंघम शहर में सरकारी मंत्रियों और अन्य बड़े राजनेताओं से मिल सकते हैं और भारतीय समुदाय के लोगों की एक सभा को भी संबोधित कर सकते हैं। फिलहाल वो ब्रिटेन में ही हैं और आज वहां उनका दूसरा दिन है।
अपने चार दिवसीय यूरोप दौरे के दौरान सबसे पहले राहुल गांधी ने जर्मनी पहुंचे थे, जहां उन्होंने हैम्बर्ग के बुसेरियस समय स्कूल में छात्रों को संबोधित किया। साथ ही राहुल ने यहां अपने पिता को खोने के बाद के अपने दिल के जज्बातों को बयां किया। राहुल गांधी ने यह राज भी खोला कि भारतीय संसद में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गले क्यों लगाया था। इसके साथ ही राहुल ने भारत में रोजगार की समस्या, महिला सुरक्षा, दलित मसले और मॉब लिंचिंग पर खुलकर बात की।
हैम्बर्ग में एक कार्यक्रम के दौरान मोदी को गले लगाने के सवाल पर राहुल ने कहा, ‘इसके पीछे मूल विचार यह है कि यदि कोई आपसे घृणा करता है, तो यह उसका अंदाज है, लेकिन उसी अंदाज में घृणा से उसका जवाब देना मूर्खता है। उससे किसी समस्या का हल नहीं निकलेगा। आप अपनी भावना कैसे व्यक्त करते हैं उस पर आपका पूरा नियंत्रण होता है।'
उन्होंने बताया कि खुद उनकी पार्टी के कुछ सदस्यों को उनका मोदी से गले मिलना अच्छा नहीं लगा था। राहुल ने हिंसा पर भी बात करते हुए कहा कि मेरे परिवार के दो लोगों, मेरे पिता और दादी की हत्या हुई है। हिंसा से हिंसा को खत्म नहीं किया जा सकता। उससे अहिंसा से ही निपटा जा सकता है।
राहुल ने कहा कि नोटबंदी और जीएसटी को सही तरीके से लागू नहीं करने से बेरोजगारी बढ़ी है। जिससे लोगों में गुस्सा पैदा हो रहा है और भीड़ हिंसा की घटनाएं हो रही हैं। उन्होंने कहा कि भारत में रोजगार की बड़ी समस्या है, लेकिन प्रधानमंत्री उस पर बात नहीं करना चाहते। चीन हर रोज पचास हजार लोगों को रोजगार देता है, जबकि भारत में रोजाना 400 लोगों को ही रोजगार मिलता है।
इसके अलावा कार्यक्रम में राहुल ने महिला सुरक्षा, दलित मसले और मॉब लिंचिंग पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि दलित, अल्पसंख्यक और पिछड़ों को अब सरकारी लाभ नहीं मिलता। गरीबों की योजनाओं का पैसा अब महज चंद बड़े कॉरपोरेट को दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत चीन के मुकाबले अमेरिका के ज्यादा करीब है, फिर भी भारत अपने हित में फैसले लेगा।