भारत ने शुक्रवार को साउथ एशिया सैटेलाइट का प्रक्षेपण कर दिया है। इसे मोदी की तरफ से सार्क देशों को गिफ्ट दिया गया है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अनुसार, संचार उपग्रह (जीसैट-9) का प्रक्षेपण 5 मई को जीएसएलवी-09 रॉकेट द्वारा श्रीहरिकोटा के अंतरिक्ष उड़ान स्थल से किया गया। इस उपग्रह का उद्देश्य दक्षिण एशिया के देशों के बीच संपर्क, संचार और आपदा सहायता उपलब्ध कराना है।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के चेयरमैन ए एस किरण कुमार ने बताया कि पाकिस्तान इस संचार उपग्रह के प्रोजेक्ट में शामिल नहीं होना चाहता था। उसे छोड़कर इस परियोजना में दक्षिण एशिया के सभी देश शामिल हैं। यह सैटेलाइट 12 वर्ष से ज्यादा के मिशन जीवन के लिए डिजाइन किया गया है।
#WATCH: ISRO launches South Asia Satellite GSAT-9 from Andhra Pradesh's Sriharikota. pic.twitter.com/wbANKY4yq2
— ANI (@ANI_news) May 5, 2017
जानिए भारत के इस तोहफे से खुद भारत और दक्षिण एशिया के देशों को क्या फायदा मिलेगा
GSAT-9
- GSAT-9 से मिलने वाले डेटा को नेपाल, भूटान, मालदीव, बांग्लादेश और श्रीलंका के साथ साझा किया जाएगा। इस योजना से जुड़ने के लिए पाकिस्तान से भी कहा गया था लेकिन उसने ये कहकर मना कर दिया कि उसके पास अपनी अंतरिक्ष योजनाएं हैं।
- सैटेलाइट का कम से कम एक ट्रांसपोंडर सार्क के सारे देशों के लिए उपलब्ध होगा। जिससे उन्हें एक दूसरे से जुड़ने में मदद मिलेगा। सार्क के देशों को उपहार देने वाला भारत पहला देश बन गया है। इसके अलावा अफगानिस्तान को भी इसमें जोड़ने की योजना है।
- इस योजना में भाग लेने वाले देश करीब 10 हजार करोड़ रुपए के फायदे का अनुमान लगा रहे हैं।
- प्रत्येक देश को अपने मूल आधारभूत ढांचे का विकास करना होगा, हालांकि भारत इसमें उनकी सहायता करने के लिए तैयार है।
- इस सेटेलाइट योजना में भाग लेने वाले देशों को सुरक्षित हॉटलाइन उपलब्ध कराने की क्षमता भी है, क्योंकि इस क्षेत्र में भूकंप, चक्रवात, बाढ़, सूनामी आदि होने की संभावना है, इससे आपदाओं के समय महत्वपूर्ण संचार लिंक उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।
- 2230 किलोग्राम के उपग्रह को तीन साल में बनाया गया है और यह पूरी तरह से एक संचार उपग्रह है जिसकी लागत 235 करोड़ रुपये है। सैटेलाइट का मुख्य ढांचा आयाताकार है। इस सैटेलाइट का जीवनकाल 12 साल से अधिक है।
- यह मिशन 30 जून, 2014 को किया गया प्रधानमंत्री मोदी के उस प्रस्ताव का हिस्सा है, जब उन्होंने एक उपग्रह को विकसित करने के लिए कहा था। इसके अलावा उन्होंने इस उपहार को पड़ोसी देशों को समर्पित करने की बात भी की थी।
- एक्सपर्ट्स का कहना है कि पाकिस्तान ने एक सुनहरा मौका गंवा दिया। उसके द्वारा चलाया जा रहा स्पेस प्रोग्राम भारत के मुकाबले अभी शुरुआती स्तर पर है। इस तथ्य के अलावा पाकिस्तान अपना पहला रॉकेट भारत के लॉन्च करने के करीब पांच साल बाद लॉन्च कर पाएगा जबकि उसकी स्पेस एजेंसी पाकिस्तान स्पेस एंड अपर एटमॉसफेयर रिसर्च कमिशन भारत की स्पेस एजेंसी इसरो से काफी पुरानी है।