गूगल इंडिया ने गुलाम भारत की पहली महिला डॉक्टर रखमाबाई राउत को उनके 153 वें जन्मदिन पर आज का डूडल समर्पित किया है। रखमाबाई का जन्म मुंबई में 22 नवंबर 1864 को हुआ था। डूडल में रखमाबाई को साड़ी में स्टेथोस्कोप के साथ दिखाई गई हैं, उनके पीछे वार्ड का सीन है जिसमें मरीज लेटे हुए और नर्स काम करती हुई दिखाई दे रही हैं।
कहते हैं कि अगर आज देश की महिलाएं सशक्त हैं उसमें रखमाबाई का बहुत बड़ा योगदान है। रखमाबाई जब 14 साल की थी, तब उनकी शादी कर दी गई थी। रखमाबाई की मां का भी बाल विवाह ही हुआ था।
रखमाबाई भारत की पहली महिला डॉक्टर्स में से एक थीं। मात्र 14 साल की उम्र में उनकी मर्जी जाने बिना उनकी शादी दादाजी भीकाजी से कर दी गई थी। उस समय देश में बाल विवाह का प्रचलन था। भीकाजी ने उनकी शिक्षा रुकवाकर उनको अपने साथ रहने पर मजबूर किया। इस मजबूरी के बाद दोनो पति पत्नी में खटपट शुरू हो गई।
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भीकाजी उन्हें साथ रखने के लिए 1884 में बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर कर दी कि रखमाबाई उनके साथ नहीं रहती हैं तब कोर्ट ने रखमाबाई से कहा कि वह या तो अपने पति के साथ रहें या जेल जाएं। रखमाबाई के जवाब ने सभी को चौंका दिया जब उन्होंने कहा कि पति के साथ रहने से अच्छा है कि वह जेल में रहें।
कानूनी रूप से वो अपने पति से 1888 में अलग हो गईं और फिर मेडिसिन की पढ़ाई के लिए इंगलैंड चली गईं। फिर 1894 में में डॉक्टर बन कर वापस आईं और सूरत, राजकोट और बांबे में 35 वर्षों तक रहीं और प्रैक्टिस किया। उनकी मृत्यु 25 सितंबर 1955 को हुई। रखमाबाई एक डॉक्टर के अलावा एक बेहतरीन समाजसेवी के रूप में भी कई काम किए। बाल विवाह और पर्दा प्रथा का भी जमकर विरोध किया। वो एक बेहतरीन डॉक्टर के साथ-साथ प्रखर नारीवादी भी थीं।