इनमें से चार लाइनें अभी चालू हैं जबकि असम स्थित पांचवीं लाइन का परिचालन अभी बंद है। अधिकारी ने बताया कि रेल मंत्रालय ने इन लाइनों की परिचालन व्यवहारिकता के बारे में जानने कि लिए जोनल रेलवे से जानकारी मांगी है। जैसे ही अप्रैल के तीसरे हफ्ते तक जोनल रेलवे की ओर से जवाब आएगा वैसे ही मंत्रालय इस योजना को लॉन्च करेगा।
लाइनों के बारे में जानकारी देते हुए रेलवे अधिकारी ने बताया कि गुजरात स्थित विसावरा-तलाला जाने वाली लाइन गुजरात के गिर जंगलों से होते हुए गुजरती है। अभी इस लाइन से एक दिन में महज तीन ट्रेनें ही गुजरती हैं। वहीं मध्यप्रदेश स्थित लाइन पहाड़ियों, घाटियों और सुरंगों से होते हुए गुजरती हैं। साथ ही यह चोलर और मीलिन्दी नदियों को भी पार करते हुए जाती है जिससे यात्रा और भी यादगार बन जाती है खासकर बारिशों के बाद।
उत्तरप्रदेश स्थित लाइन दुधवा टाइगर रिजर्व से होते हुए गुजरती है। अभी यहां तकरीबन छह ट्रेनें चलती हैं जो 30 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चलती हैं। जिसे एक्सीडेंट के खतरे के कारण 20 किमी कर दिया गया है। यह लाइन ब्रिटिश काल में 19 वीं सदी में बनाई गई थी।
अभी पहाड़ी ट्रेनों में दार्जिलिंग हिमालयन ट्रेन, नीलगिरी पहाड़ी रेलवे, कालका-शिमला रेलवे, कांगड़ा वैली रेलवे और मैथेरन हिल रेलवे पर्यटकों के लिए भारत में सबसे आकर्षित पहाड़ी
ट्रेनें हैं।