मच्छरों से होने वाली घातक बीमारियां हर साल दस लाख लोगों की जान ले लेती हैं। फिर भी कई वैज्ञानिकों ने मच्छरों के पूरी तरह खात्मे को इंसानों के लिए घातक बताया है। एक रिपोर्ट में फ्लोरिडा के कीट वैज्ञानिक फिल लोनीबस कहते हैं कि मच्छरों को कई पक्षी और कीड़े खाते हैं। इनका लार्वा मछलियां और मेढक खाते हैं। अगर मच्छर खत्म हो जाएं तो यह पूरी खाद्य शृंखला टूट सकती है। वहीं मच्छरों के खात्मे के बाद अगर उसकी जगह नए जीव ने ली तो नया खतरा हो सकता है। आशंका है कि वह जीव मच्छरों से ज्यादा खतरनाक हो। नया जीव ज्यादा खतरनाक और बड़े क्षेत्र में बीमारियां फैला सकता है।
टूट सकती है जीवों की आहार शृंखला, नए घातक जीव ले सकते हैं जन्म
विज्ञान लेखक डेविड क्वामेन के मुताबिक मच्छरों ने इंसानों को गर्म इलाकों के जंगलों में बसने से रोक रखा है। अगर मच्छर न हों तो इंसानों के चलते ऊष्णकटिबंधीय जंगल पर बड़ा खतरा मंडराने लगेगा। मच्छरों ने इन जंगलों को दस हजार साल से बचाया हुआ है।
सिर्फ तीन फीसदी प्रजाति के मच्छर फैलाते बीमारियां
दुनिया में मच्छरों की 3500 प्रजातियां हैं। इनमें से ज्यादातर नस्ले इंसानों को बिल्कुल नुकसान नहीं पहुंचाती हैं और पौधों व फलों के रस का सेवन करती हैं। सिर्फ छह फीसदी प्रजातियों की मादा मच्छर इंसानों का खून पीती हैं, जिनमें से आधी में बीमारियों के वायरस होते हैं।
दस साल में मच्छरों से जीत जाएगा इंसान
ग्रीनिच यूनिवर्सिटी के फ्रांसिस हॉक्स ने बताया कि मच्छरों के पूरी तरह खात्मे का कोई तरीका अब तक विकसित नहीं हुआ है। जीन बदलकर तैयार किए गए मच्छरों ने मच्छरों की आबादी घटाई है। पर यह बेहद सीमित क्षेत्र में कारगर है। पर वैज्ञानिक मच्छर भगाने वाली नई दवा समेत कई ऐसी तकनीक विकसित कर रहे हैं, जो जीका, मलेरिया फैलाने वाले खतरनाक मच्छरों से बचाएगी। उनका दाव है, 10-15 साल में इंसान मच्छरों से जंग जीत जाएंगे।