एआईएडीएमके के दो धड़े ओ. पन्नीरसेल्वम (ओपीएस) और ई पलानीस्वामी (ईपीएस) के विलय को लेकर चल रही रस्साकस्सी में एक अहम मोड़ सामने आया है। एआईडीएमके के दोनों धड़ों के बीच सकारात्मक बातचीत जा रही है।
The talks on merger are going on smoothly and in one or two days a concrete decision will be known: O Panneerselvam on #AIADMKMerger pic.twitter.com/PwwcD2d986— ANI (@ANI) August 19, 2017
पूर्व मुख्यमंत्री ओ पन्नीसेल्वम ने कहा है कि इसके निर्णय का ऐलान एक दो दिन में किया जा सकता है। अपने गुट के सीनियर नेताओं के साथ मीटिंग के दौरान पूर्व सीएम ने यह बातें कही। दोनों गुटों के बीच अब कोई मतभेद नहीं है। हम एमजीआर और अम्मा के रास्ते पर आगे बढ़ेंगे।
There are no differences within the faction. We will carry forward on the path of MGR & 'Amma': O Panneerselvam on #AIADMKMerger pic.twitter.com/HcizmXJTTa— ANI (@ANI) August 19, 2017
बता दें कि शुक्रवार की रात पन्नीरसेल्वम गुट ने पलानीस्वामी गुट के सामने विलय की बहुत बड़ी शर्त रख दी है। पन्नीरसेल्वम धड़े की मांग है कि अगर पार्टी विलय चाहती है तो पन्नीरसेल्वम को राज्य का मुख्यमंत्री चुनना होगा। ओपीएस गुट ने कहा कि पन्नीरसेल्वम राज्य के लिए तीन बार मुख्यमंत्री चुने जा चुके हैं तो विलय के बाद उनके उप मुख्यमंत्री बनने का सवाल ही पैदा नहीं होता।
कैंप में एक दूसरे गुटों पर बयानबाजी भी की जाती रही। वहीं, सूबे की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता मेमोरियल में विधायकों का धड़ा दोनों नेताओं के फैसले के इंतजार में था। लेकिन ईपीएस धड़े से ओपीएस की शर्त पर कोई जवाब नहीं आया।
शुक्रवार रात 9 बजे तक पूर्व मंत्री सी पोनियान ने ओपीएस के निवास से बाहर आकर बोला कि आज रात किसी भी फैसले का इंतजार करना बेकार है। वहीं, थोड़ी देर बाद ही सभी नेतागण ओपीएस के निवास स्थान से चले गए। जिनमें से रोयापेत्ताह, टीटीवी दिनाकरण कुछ विधायकों के साथ होटल में के लिए निकल पड़े।
ओपीएस कैंप के एक सदस्य ने बताया कि शुक्रवार रात को हुई चर्चा उप मुख्यमंत्री पद के इर्द गिर्द ही घूमती रही। बता दें कि ओपीएस गुट गृह और वित्त मंत्रालय भी अपने पास रखना चाहता है। लेकिन ईपीएस इस बात से सहमत नहीं हुआ।
जबकि ईपीएस पब्लिक वेलफेयर विभाग ओपीसी को देने के इच्छुक है। सूत्रों के मुताबिक, ईपीएस के कई वरिष्ठ नेता ओपीएस के पन्नीरसेल्वम को सीएम बनाए जाने के पक्ष में हैं। वहीं, इस अनबन से ईपीएस के बंटने की भी संभावना जताई जा रही है।