चीनी सैनिकों के दुस्साहस पर नजर रखने के लिए अब आईटीबीपी और इंटेलिजेंस एजेंसियां बाज तंत्र पर काम करेंगी। गश्त के दौरान आईटीबीपी कर्मियों को इस तरह के उपकरण मुहैया कराए जाएंगे, जिससे वे घाटी में बहुत नीचे तक की गतिविधियां साफ देख सकें। केंद्रीय गृह मंत्रालय के सूत्रों ने उपकरणों का खुलासा न करने की शर्त पर बताया कि ये 'बाज' की तरह काम करेंगे।
सूत्रों के अनुसार, इंटेलिजेंस एजेंसियों और सुरक्षा बलों के बीच तालमेल को और ज्यादा बेहतर करने की दिशा में काम शुरू हो गया है। अभी तक ये एजेंसियां अपने स्तर पर जानकारी जुटाना और उसके बाद तय नियमों के तहत उसे आपस में साझा करना जैसे पैटर्न पर काम करती थीं। इनके लिए अब एक नया पैटर्न तैयार किया गया है।
आईटीबीपी के पूर्व डीआईजी जेवीएस चौधरी का कहना है कि सर्दियों में हमारे जवान चीन के मुकाबले ज्यादा स्वस्थ रहते हैं। चीनी सैनिक लद्दाख में अधिक ऊंचाई वाले इलाकों की कड़कड़ाती ठंड सहने के आदी नहीं हैं।
चूंकि अब लद्दाख में तैनात जवानों को एक्सट्रीम कोल्ड वेदर पोर्टेबल केबिन मुहैया कराए जा रहे हैं, इससे उन्हें अपनी ड्यूटी में सहुलियत होगी। लद्दाख में चीन की तरफ वाला ज्यादातर हिस्सा समतल है और वहां बर्फबारी की समस्या भी नहीं है।
इसके बावजूद आईटीबीपी फ्रंट फुट पर रहते हुए अपनी ड्यूटी देती है।आईटीबीपी को मिल रही फॉर बाई फॉर गाड़ियां एवं एटीवी जवानों के लिए मल्टी प्लायर फोर्स का काम करेंगे।