उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनावों में भाजपा का परचम लहराने के लिए राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) अब एक्शन मोड में आ गया है। बुधवार को यहां समन्वय बैठक कर आरएसएस के रणनीतिकारों ने सर्जिकल स्ट्राइक और नोटबंदी के केंद्र सरकार के फैसले पर आम जनता के समर्थन को चुनाव में कैश कराने पर मंथन किया। साथ ही स्वयंसेवकों को अनुशासन का पाठ पढ़ाते हुए चुनाव के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों पर सख्त दिशा निर्देश दिए।
करीब आठ घंटे तक चली बैठक में आरएसएस और उसके अनुषांगिक संगठनों ने 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा और मोदी लहर को एक बार फिर दोहराने का संकल्प लिया। खास बात यह रही कि बैठक से स्थानीय भाजपा नेताओं और मीडिया को दूर रखा गया।
नगर के भूड़ रोड स्थित विराट फार्म हाउस में बुधवार को हुई समन्वय बैठक का मुख्य एजेंडा आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत, कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों में अनुशासन व मर्यादा, सभी अनुषांगिक संगठनों में आपसी समन्वय के साथ भाजपा के मंच से आरएसएस पदाधिकारियों की दूरी आदि रहा। बैठक में बताया गया कि कैसे एक बार फिर यूपी में भाजपा और मोदी लहर को फतह पताका बनाना है।
कहा गया कि पाकिस्तान में घुसकर की गई सर्जिकल स्ट्राइक और नोटबंदी के बाद पब्लिक के उत्साह को कैसे भाजपा के पक्ष में करना है। नोटबंदी के बाद विपक्षियों के भारत बंद के फ्लाप होने को कैसे जनता के बीच प्रचारित करना है। साथ ही आरएसएस पदाधिकारियों को बताया गया कि कोई भी पदाधिकारी या कार्यकर्ता पार्टी के भाजपा के मंच पर नहीं चढ़ेगा और न ही माइक से नहीं बोलेगा। चुनाव में भाजपा को पीछे से सपोर्ट करने के निर्देश दिए गए। बैठक में वेस्ट यूपी की सीटों पर टिकट के दावेदारों को लेकर भी चर्चा हुई।
कहा गया कि प्रत्याशी चयन में उनके बैकग्राउंड का खास ध्यान रखा जाए। ऐसे लोगों को टिकट दिया जाए जो आपराधिक छवि के न हों और जिनकी जनता के अच्छी छवि के हो। इस दौरान आरएसएस के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल, भाजपा के संगठन महामंत्री रामलाल, सह संगठन मंत्री शिवप्रकाश, प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य, प्रदेश के महामंत्री संगठन सुनील बंसल, प्रभारी ओम माथुर समेत ब्रज प्रांत के तमाम बड़े पदाधिकारी मौजूद रहे।